ब्रिक्स: होर्मुज सभी के लिए खुला पर, दुश्मन देशों के लिए बंद: ईरान
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। उन्होंने भारत की भूमिका की सराहना की और कहा कि क्षेत्रीय संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है। अमेरिका के साथ वार्ता की संभावनाएं कमजोर हैं, जब तक कि अमेरिका गंभीरता नहीं दिखाता।

नई दिल्ली, एजेंसी। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को कहा कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के अपने ऐतिहासिक दायित्व का पालन करता रहेगा। उन्होंने कहा कि यह मार्ग सभी देशों के जहाजों के लिए खुला है, सिवाय उन देशों के जो ईरान के साथ युद्ध में हैं। ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने नई दिल्ली आए अराघची ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ पश्चिम एशिया की स्थिति और द्विपक्षीय संबंधों पर विस्तृत बातचीत की। अराघची ने कहा कि क्षेत्रीय संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है। बातचीत ही इसका एकमात्र रास्ता है। उन्होंने भारत की संभावित भूमिका का स्वागत करते हुए कहा कि वह पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बहाल करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा, हम भारत की किसी भी रचनात्मक भूमिका का स्वागत करेंगे。
ईरान की नौसेना के साथ समन्वय
ईरानी विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को ईरानी नौसेना के साथ समन्वय करना होगा, क्योंकि क्षेत्र की स्थिति फिलहाल बेहद जटिल है। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि टकराव समाप्त होने के बाद हालात सामान्य हो जाएंगे।
अमेरिका के साथ संबंध
अमेरिका के साथ संबंधों पर अराघची ने कहा कि तेहरान को वॉशिंगटन पर भरोसा नहीं है। उनके मुताबिक, अमेरिका के विरोधाभासी संदेशों और दबाव की नीति ने वार्ता की संभावनाओं को कमजोर किया है। उन्होंने कहा कि ईरान केवल तभी बातचीत करेगा जब अमेरिका गंभीरता और विश्वसनीयता दिखाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें विफल नहीं हुई हैं, बल्कि कठिन दौर से गुजर रही हैं।
परमाणु हथियारों पर स्थिति
अराघची ने अमेरिका पर दबाव की राजनीति अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कई देश अलग-अलग रूपों में इसी तरह के दबाव का सामना कर रहे हैं। अब समय आ गया है कि इसके खिलाफ सामूहिक आवाज उठाई जाए। उन्होंने दोहराया कि ईरान ने कभी परमाणु हथियार हासिल करने की इच्छा नहीं रखी।
जयशंकर की टिप्पणी
इस बीच, जयशंकर ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया के ताजा घटनाक्रम, उनके वैश्विक प्रभाव और आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा हुई।
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