अमेरिका के साथ सार्थक बातचीत हुई : ईरान

Feb 06, 2026 09:25 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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- ओमान में हुई दोनों देशों के बीच वार्ता, आगे भी जारी रखेंगे

अमेरिका के साथ सार्थक बातचीत हुई : ईरान

ओमान में हुई दोनों देशों के बीच वार्ता, आगे भी जारी रखेंगे मस्कट/दुबई, एजेंसी। ईरान और अमेरिका के बीच ओमान में शुक्रवार को हुई परमाणु वार्ता एक अच्छी शुरुआत रही और यह आगे भी जारी रहेगी। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने यह बयान ऐसे समय में दिया है, जब इन वार्ताओं के विफल होने से मध्य पूर्व में एक और युद्ध भड़कने की आशंका जताई जा रही है। अराघची ने ईरानी सरकारी टेलीविजन से कहा कि यह वार्ता की एक अच्छी शुरुआत थी और बातचीत जारी रखने पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि अगर यह प्रक्रिया जारी रहती है, तो मुझे लगता है कि हम किसी अच्छे समझौता तक पहुंच जाएंगे।

विदेश मंत्री के मुताबिक ओमान की राजधानी मस्कट में ओमानी मध्यस्थता के जरिये अप्रत्यक्ष बातचीत करने वाले दोनों पक्षों के अधिकारी अब परामर्श के लिए अपने-अपने देशों में लौटेंगे। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना से बातचीत में अराघची ने कहा कि संवाद के लिए धमकियों और दबाव से बचना जरूरी है। उन्होंने साफ किया कि तेहरान केवल अपने परमाणु मुद्दे पर चर्चा करता है। हम अमेरिका के साथ किसी अन्य विषय पर चर्चा नहीं करते। उधर, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार को कहा था कि हालांकि दोनों पक्षों ने पश्चिम के साथ ईरान के लंबे समय से चले आ रहे परमाणु विवाद पर कूटनीति बहाल करने की इच्छा जताई है, लेकिन वाशिंगटन चाहता है कि बातचीत का दायरा बढ़ाकर इसमें ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों, क्षेत्र में सशस्त्र समूहों को समर्थन और अपने ही नागरिकों के साथ व्यवहार जैसे मुद्दों को भी शामिल किया जाए। पिछले साल बेपटरी हो गई थी वार्ता अमेरिका और ईरान के बीच कई दौर की बातचीत पिछले साल जून में उस समय विफल हो गई थी, जब इजरायल ने तेहरान पर हमला कर दिया था। दोनों देशों के बीच 12 दिनों तक चले युद्ध के दौरान अमेरिका ने भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर बम बरसाए थे, जिससे यूरेनियम संवर्द्धन के काम में जुटे कई सेंट्रीफ्यूज संभवत: नष्ट हो गए थे। वहीं, इजराइली हमलों में ईरान की वायु रक्षा प्रणाली और बैलिस्टिक मिसाइल भंडार को निशाना बनाया गया था। विरोध प्रदर्शन के बाद बातचीत ईरान में मुद्रास्फीति और मुद्रा अवमूल्यन को लेकर पिछले महीने हुए देशव्यापी विरोध-प्रदर्शनों के बाद देश का धार्मिक शासन 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से अपने सबसे कमजोर दौर में है। ऐसे में जानकारों का कहना है कि ट्रंप वर्षों के छद्म युद्ध, आर्थिक संकट और आंतरिक अशांति के कारण अस्थिरता के दौर से गुजर रहे ईरान को नए परमाणु समझौते के लिए तैयार होने पर मजबूर कर सकते हैं।

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