इस हफ्ते भी सेंसेक्स-निफ्टी में तेज उतार-चढ़ाव संभव

Newswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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मुंबई में घरेलू शेयर बाजारों में गिरावट जारी है। ईरान युद्ध की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से सेंसेक्स और निफ्टी प्रभावित हो सकते हैं। पिछले सप्ताह सेंसेक्स 949.74 अंक गिरकर 73,583.22 पर बंद हुआ। विदेशी निवेशकों ने 1.14 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं, जिससे बाजार पर दबाव बना है।

इस हफ्ते भी सेंसेक्स-निफ्टी में तेज उतार-चढ़ाव संभव

मुंबई, एजेंसी। घरेलू शेयर बाजारों में पिछले कुछ सप्ताह से जारी गिरावट के बीच आने वाले सप्ताह में एक बार फिर निवेशकों की नजर ईरान युद्ध की स्थिति पर रहेगी। कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ने वाले असर से सेंसेक्स-निफ्टी में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। विश्लेषकों ने यह राय जताई है। विश्लेषकों ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बनी रह सकती है और भू-राजनीतिक कारणों से बाजार का रुझान बदल सकता है। खासकर कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर बाजार पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ऊंची तेल कीमतों से बाजार पर दबाव बना रहेगा, जबकि कीमतों में गिरावट से बाजार में तेजी देखने को मिल सकती है।

इसके अलावा रुपये-डॉलर का रुख और विदेशी निवेशकों की कारोबारी गतिविधियां भी इस सप्ताह में धारणा को प्रभावित करेंगी। सोमवार 30 मार्च को फरवरी के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े जारी होने हैं। वाहनों की बिक्री आंकड़े भी जारी किए जाएंगे। इन सभी कारकों का असर शेयर बाजारों पर दिखेगा।पिछले हफ्ते आई भी तेज गिरावटबीएसई का सेंसेक्स पिछले सप्ताह 949.74 अंक (1.27 प्रतिशत) लुढ़ककर शुक्रवार को 73,583.22 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी-50 सूचकांक भी इस दौरान 294.90 अंक यानी 1.27 प्रतिशत टूटकर 22,819.60 अंक पर आ गया। मझौली और छोटी कंपनियों पर भी दबाव रहा। सप्ताह के दौरान नफ्टिी मिडकैप-50 सूचकांक 1.13 प्रतिशत और स्मॉलकैप-100 सूचकांक 0.63 प्रतिशत गिरकर बंद हुए।बॉक्सविदेशी निवेशकों ने निकाले 1.14 लाख करोड़ रुपयेविदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने मार्च में अब तक घरेलू शेयर बाजार से 1.14 लाख करोड़ रुपये (लगभग 12.3 अरब डॉलर) निकाले हैं। यह एफपीआई की भारतीय बाजार से सबसे बड़ी मासिक निकासी है। पश्चिम एशिया संघर्ष, कमजोर होता रुपया और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से भारत की वृद्धि पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर विदेशी निवेशक आशंकित हैं, जिससे वजह से वे बिकवाली कर रहे हैं। इस महीने का एक कारोबारी सत्र अभी बचा है, जिससे निकासी का आंकड़ा और बढ़ सकता है। इससे पहले अक्टूबर, 2024 में एफपीआई ने एक महीने में सबसे अधिक 94,017 करोड़ रुपये की निकासी की थी।इनका दिखेगा असर1. वैश्विक बाजारों का रुझान2. कच्चे तेल की कीमतें3. अमेरिका-ईरान में वार्ता प्रगति4. रुपये की चाल6. विदेशी निवेशकों की गतिविधि7. औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ेबॉक्स

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