
आजादी के लिए ‘स्टॉक्स’ खरीद रहे युवा
भारत में 21 से 25 साल के युवाओं पर हुई एक स्टडी में पता चला है कि उनका निवेश मानसिक संतोष से जुड़ा है। युवा तब निवेश करते हैं जब वे स्वतंत्रता महसूस करते हैं और उन पर कोई दबाव नहीं होता। दोस्तों और परिवार का समर्थन महत्वपूर्ण है, लेकिन अधिक आत्मविश्वास भी निवेश में देरी कर सकता है।
21 से 25 साल के युवाओं के लिए निवेश मानसिक संतोष से जुड़ा है युवा पीढ़ी तब निवेश करती है, जब उन्हें लगता है कि वे दबाव में नहीं हैं वेल्लोर, एजेंसी। भारत में 21 से 25 साल के युवाओं पर की गई एक स्टडी से पता चला है कि नई पीढ़ी के लिए निवेश करना पैसा बढ़ाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह उनके मानसिक संतोष और आजादी से जुड़ा है। ज्ञान से ज्यादा आजादी जरूरी : पुरानी सोच थी कि अगर युवाओं को निवेश की जानकारी दी जाए, तो वे शेयर खरीदने लगेंगे। लेकिन वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के विशेषज्ञों की यह रिसर्च कहती है कि युवा पीढ़ी तब निवेश करती है, जब उन्हें लगता है कि वे अपने फैसले खुद ले रहे हैं और उन पर किसी का दबाव नहीं है।
युवा निवेश की दुनिया में खुद को ‘मास्टर’ महसूस करना चाहते हैं। जब उन्हें लगता है कि वे बाजार को समझ रहे हैं और इसमें अच्छे हैं, तभी वे पैसा लगाने का मन बनाते हैं। दोस्तों और परिवार का असर : इस पीढ़ी के लिए सोशल सपोर्ट बहुत मायने रखता है। अगर माता-पिता निवेश को सही मानते हैं और दोस्त पोर्टफोलियो पर चर्चा करते हैं, तो युवाओं का बाजार में आने का इरादा और मजबूत हो जाता है। ओवर-कॉन्फिडेंस का खतरा : दिलचस्प बात यह है कि बहुत ज्यादा कॉन्फिडेंस होने पर युवा अक्सर निवेश करने में देरी कर देते हैं, क्योंकि वे सही फैसला लेने के चक्कर में ज्यादा सोचने लगते हैं। कंपनियों के लिए सीख : विशेषज्ञों का कहना है कि अब बैंकों और ऐप को ‘जल्दी रिटर्न’ का वादा छोड़कर युवाओं को निवेश सिखाने और उन्हें फैसले लेने की ताकत देने पर फोकस करना चाहिए।

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