
नौसेना में शामिल हुआ सर्वेक्षण पोत आईएनएस इक्शाक
संक्षेप: आईएनएस इक्शाक, जो 110 मीटर लंबा है और 18 समुद्री मील की गति प्राप्त कर सकता है, औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना में शामिल हो गया है। यह सर्वेक्षण पोत जीआरएसई कोलकाता द्वारा निर्मित है और 11,000 मीटर की गहराई तक स्कैन करने की क्षमता रखता है। इसमें महिलाओं के लिए विशेष आवास भी है।
नंबर गेम : - 110 मीटर लंबा है इक्शाक, - 18 समुद्री मील गति कर सकता है हासिल कोच्चि, एजेंसी। स्वेदश में निर्मित तीसरा सर्वेक्षण पोत आईएनएस इक्शाक गुरुवार को औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना में शामिल हो गया है। कोच्चि में आयोजित कार्यक्रम में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने इसका जलावतरण किया। 2025 में भारतीय नौसेना में शामिल होने वाला यह 10वां पोत है। नौसेना प्रमुख ने इक्शाक को भारतीय नौसेना और भारत के जहाज निर्माण उद्यम के लिए एक और मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना के क्षमता विस्तार और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार लगातार कदम उठा रही है।

नौसेना अपनी जल सर्वेक्षण क्षमताओं को और सशक्त बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। जल्द ही इक्षक सर्वेक्षण पोत को नौसेना में शामिल किया जाएगा। आगे उन्होंने कहा कि समुद्री क्षेत्र वर्तमान में भू-राजनीति, प्रौद्योगिकी और रणनीति के कारण गहन परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। समुद्र में प्रभाव, संसाधनों और संपर्क के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है। नई तकनीक महत्वपूर्ण खनिजों को लेकर प्रतिस्पर्धा को नया आयाम दे रही है। इससे महासागरों का रणनीतिक मानचित्र तेजी से बदल रहा है। भारतीय नौसेना के सर्वेक्षण जहाज भारत और उसके समुद्री साझेदारों के लिए समुद्र को ज्ञानवर्धक, और सुरक्षित बनाने की दिशा में काम करते हैं। - 11 हजार मीटर तक स्कैन 110 मीटर लंबे इक्शाक पोत का निर्माण जीआरएसई कोलकाता ने किया है। यह अत्याधुनिक हाइड्रोग्राफिक और समुद्र विज्ञान प्रणालियों से लैस है और 11 हजार मीटर की गहराई तक स्कैन कर सकता है। इसका विस्थापन 3,400 टन है और एक बार में 231 लोगों को ले जा सकता है, जिसमें 20 अधिकारी और 211 नाविक शामिल हैं। यह अधिकतम 18 समुद्री मील की गति प्राप्त कर सकता है। - महिलाओं के लिए विशेष आवास इक्शाक पहला बड़ा सर्वेक्षण पोत है, जिसमें महिलाओं के लिए विशेष आवास डिजाइन किया गया है। यह हेलीकॉप्टर सहायता भी प्रदान करता है। आवश्यकता पड़ने पर आपदा राहत कार्यों के लिए या अस्पताल के रूप में भी काम कर सकता है।

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