रुपया 76 पैसे के गोते के साथ सबसे निचले स्तर पर पहुंचा

Jan 21, 2026 05:57 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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मुंबई में रुपया बुधवार को 76 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91.73 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ। वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता और विदेशी पूंजी की निकासी के कारण घरेलू मुद्रा पर दबाव रहा। इस गिरावट का मुख्य कारण भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई का खतरा है।

रुपया 76 पैसे के गोते के साथ सबसे निचले स्तर पर पहुंचा

मुंबई, एजेंसी। रुपया बुधवार को 76 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर 91.73 (अस्थायी) पर बंद हुआ। वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता एवं जोखिम से बचने की धारणा के बीच विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी से घरेलू मुद्रा पर दबाव रहा। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि रुपये 16 दिसंबर 2025 को 91.14 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था। इस महीने अब तक स्थानीय मुद्रा में 1.50 प्रतिशत की गिरावट आई है। इस गिरावट का कारण भू-राजनीतिक अनिश्चितता में वृद्धि है। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड मुद्दे और संभावित शुल्क को लेकर यूरोप के साथ बढ़ते तनाव के कारण निवेशकों ने सतर्कता का रुख अपनाया है।

इसके अलावा, घरेलू बाजार में नकारात्मक रुझान ने भी निवेशकों की धारणा को कमजोर किया। भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाएं अस्थिर पूंजी प्रवाह के दबाव का सामना कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, ग्रीनलैंड विवाद जिसने अमेरिका-यूरोप संबंधों में तनाव उत्पन्न किया है (जो नाटो के टूटने का खतरा है) और वेनेजुएला के तेल भंडार पर अमेरिका के नियंत्रण जैसे भू-राजनीतिक तनाव वैश्विक व्यापार पर व्यापक प्रभाव डाल रहे हैं। भारत के लिए, अमेरिका के साथ लंबित व्यापार समझौता एक प्रमुख स्थिरता कारक बना हुआ है क्योंकि इसके निष्कर्ष से विश्वास एवं द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है। इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.02 प्रतिशत की गिरावट के साथ 98.61 पर रहा। अलग-अलग वर्गों पर इस गिरावट का असर आम आदमी महंगाई बढ़ने का खतरा: पेट्रोल-डीजल, गैस, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयों जैसी आयातित वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। घर का बजट बिगड़ सकता है, क्योंकि कंपनियां बढ़ी लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डालती हैं। एफडी/बचत पर सीधा फायदा नहीं, उल्टा खर्च बढ़ सकता है। निवेशक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ता है। आयात-आधारित कंपनियों के शेयर दबाव में। निर्यातक कंपनियों के शेयरों में तेजी संभव। विदेशी निवेशक मुनाफा निकाल सकते हैं, जिससे बाजार पर दबाव। पर्यटक विदेश जाने वाले भारतीय होटल, खाना, ट्रांसपोर्ट, शॉपिंग सब महंगा। यूरोप, अमेरिका, सिंगापुर ट्रिप पर खर्च काफी बढ़ेगा। विदेशी पर्यटक भारत सस्ता लगेगा, पर्यटन को फायदा। विदेश यात्रा हवाई टिकट, वीजा फीस, ट्रैवल इंश्योरेंस महंगे। अंतरराष्ट्रीय कार्ड और फॉरेक्स खर्च बढ़ेगा। विदेश में पढ़ाई ट्यूशन फीस, हॉस्टल, रहन-सहन महंगा। अभिभावकों को ज्यादा रुपये भेजने पड़ेंगे। एजुकेशन लोन का बोझ बढ़ सकता है। विदेश में इलाज इलाज, अस्पताल खर्च, दवाइयां सब ज्यादा महंगे। अमेरिका, यूरोप जैसे देशों में इलाज और मुश्किल। कारोबारी आयात पर निर्भर कारोबारी कच्चा माल और मशीनरी महंगी पड़ेगी। मुनाफा घट सकता है या कीमतें बढ़ानी पड़ेंगी। निर्यातक फायदा: डॉलर में मिलने वाली कमाई रुपये में ज्यादा होगी। आईटी, टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटो पार्ट्स जैसे सेक्टर लाभ में। आयातक कच्चा तेल, सोना, गैस, इलेक्ट्रॉनिक्स आयात महंगा। मार्जिन घटता है या कीमतें बढ़ानी पड़ती हैं। छोटे आयातकों पर सबसे ज्यादा दबाव। सरकार और अर्थव्यवस्था तेल और उर्वरक सब्सिडी का बोझ बढ़ता है। चालू खाता घाटा बढ़ सकता है। महंगाई नियंत्रण सरकार के लिए चुनौती।

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