
एआई से हाथियों की जान बचा रहा रेलवे
भारतीय रेलवे ने नई एआई तकनीक से हाथियों को ट्रेन दुर्घटनाओं से बचाना शुरू किया है। रेलवे ने पटरियों के किनारे विशेष सेंसर लगाए हैं, जो हाथियों के कदमों की हल्की कंपन को पहचानते हैं और ड्राइवर को अलर्ट करते हैं। इससे हाथियों को सुरक्षित रूप से पटरियां पार करने में मदद मिल रही है।
नई दिल्ली, एजेंसी। भारतीय रेलवे अब नई एआई तकनीक की मदद से हाथियों को ट्रेन दुर्घटनाओं से बचा रहा है। रेलवे ने पटरियों के किनारे खास सेंसर लगाए हैं, जो पास आते हाथियों को पहले ही पहचान लेते हैं। ये सेंसर फाइबर ऑप्टिक केबल में लगे एकॉस्टिक डिवाइस होते हैं, जो लगभग 20 मीटर दूर तक हाथियों के कदमों से होने वाली हल्की-सी कंपन भी पकड़ लेते हैं। जैसे ही सेंसर को कंपन महसूस होती है, सिस्टम तुरंत एआई की मदद से उसका विश्लेषण करता है और तय करता है कि यह हाथी है या कोई और चीज। पुष्टि होने पर यह तुरंत ट्रेन ड्राइवर और कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज देता है।

इससे ड्राइवर को समय रहते ट्रेन की रफ्तार कम करने या रोकने का मौका मिल जाता है। यह तकनीक अभी असम, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में 140 किमी से ज्यादा इलाके में लगाई गई है। कुछ क्षेत्रों में हादसे लगभग पूरी तरह खत्म हो गए हैं। उदाहरण के तौर पर, तमिलनाडु के मदुक्कराई इलाके में पिछले नवंबर से 6,500 से ज्यादा बार हाथी सुरक्षित रूप से पटरियां पार कर पाए और एक भी मौत नहीं हुई। रेलवे अब इसे 1,100 किमी से ज्यादा इलाके में बढ़ाने की योजना बना रहा है, जिससे हाथियों और यात्रियों दोनों की सुरक्षा और बेहतर होगी।

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