55 प्रतिशत लोको पायलटों पर काम का अतिरिक्त भार
अखिल भारतीय लोको रनिंग स्टॉफ संघ ने दावा किया है कि भारतीय रेलवे में लोको पायलटों की भारी कमी है। 55 प्रतिशत लोको पायलट तय समय से अधिक काम कर रहे हैं। रेलवे के नियमों के अनुसार, लोको पायलट की ड्यूटी लगातार नौ घंटे से अधिक नहीं होनी चाहिए। संघ ने सुधार की मांग की है।

- अखिल भारतीय लोको रनिंग स्टॉफ संघ का दावा नई दिल्ली, एजेंसी। अखिल भारतीय लोको रनिंग स्टॉफ संघ का दावा है कि भारतीय रेलवे में लोको पायलट की भारी कमी है, जिसके चलते उन पर काम का अतिरिक्त भार पड़ रह है। संघ के अनुसार, 55 प्रतिशत लोको पायलट तय समय से अधिक काम कर रहे हैं।संगठन का दावा किया है कि वर्ष 2025-26 के दौरान भारतीय रेल के 8.85 प्रतिशत लोको पायलटों ने लगातार 12 घंटे से अधिक ड्यूटी की, जबकि 46.96 प्रतिशत को एक बार में नौ घंटे से अधिक समय तक काम पर लगाया गया। रेलवे के नियमों के अनुसार, किसी लोको पायलट की ड्यूटी लगातार नौ घंटे से अधिक नहीं होनी चाहिए और साइन-इन से साइन-आउट तक कुल समय 11 घंटे से ज्यादा नहीं होने चाहिए।
वर्ष 2021 से रेलवे बोर्ड के सुरक्षा विभाग ने सभी जोनल रेलवे को निर्देश दिया है कि 80 प्रतिशत यात्राएं नौ घंटे की सीमा के भीतर पूरी की जाएं।संघ के महासचिव केसी जेम्स ने कहा कि रेलवे बोर्ड के दावों के बावजूद आंकड़े अलग तस्वीर पेश करते हैं। उन्होंने बताया कि लगभग नौ प्रतिशत लोको पायलटों ने 12 घंटे से अधिक और लगभग 47 प्रतिशत ने नौ घंटे से अधिक ड्यूटी की। संघ ने रनिंग भत्ता पर आयकर छूट सीमा बढ़ाने और आउटस्टेशन ड्यूटी की सीमा तय करने समेत अन्य में सुधार की मांग है।- 20 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारीरेल मंत्रालय का कहना है कि लोको पायलटों के कार्यभार में सुधार के प्रयास जारी हैं। पिछले कुछ वर्षों में 15,873 सहायक लोको पायलट की भर्ती की गई है और 20 हजार से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। हाल में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में बताया था कि लोको पायलटों को 'रोजगार के घंटों के नियम' के अनुसार एक पखवाड़े में 104 घंटे काम करना होता है।
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