महिला आरक्षण के साथ लोकसभा में 850 सीट करने का प्रस्ताव
भारत सरकार लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए संविधान (131वां संशोधन) विधेयक लाने जा रही है। इसके तहत लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 की जाएंगी। प्रस्तावित विधेयक में 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन किया जाएगा। यह आरक्षण 15 साल तक लागू रहेगा।

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए लाए जा रहे संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 तथा दो अन्य विधेयकों के प्रावधानों में लोकसभा में मौजूदा 543 की जगह अधिकतम 850 सीट होंगी। इनमें राज्यों में 815 एवं केंद्र शासित प्रदेशों में 35 सीट होंगी। विधेयक में निर्वाचन क्षेत्रों का फिर से निर्धारण करने के लिए वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा। विधेयकों को गुरुवार को लोकसभा में पेश किया जाएगा। संसद की 16 से 18 अप्रैल को होने वाली बैठकों के लिए सरकार ने अपने प्रमुख विधायी कामकाज महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन करने के लिए लाए जाने वाले विधेयकों की प्रति सांसदों को भेज दी है।
इनमें सरकार लोकसभा तथा विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण सुनिश्चित करेगी। प्रस्ताव के अनुसार, लोकसभा में अब बड़ा बदलाव होगा और कुल सदस्य संख्या मौजूदा 543 की जगह 850 हो जाएगी।विधेयकों के प्रावधानों में कहा गया है कि लोकसभा में राज्यों के क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने गए 815 से अधिक सदस्य नहीं होंगे और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने के लिए 35 से अधिक सदस्य नहीं होंगे, जो संसद द्वारा पारित कानून के तहत प्रदान किए गए तरीके से चुने जाएंगे। विधेयक के अनुसार, जनसंख्या अभिव्यक्ति से तात्पर्य उस जनगणना में सुनिश्चित की गई जनसंख्या से है, जिसके संबंधित आंकड़े प्रकाशित किए जा चुके हैं। इसके अनुसार, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जाएगा। सरकार जो तीन विधेयक लाने जा रही है उनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 व केंद्र शासित कानून (संशोधन) विधेयक 2026 शामिल हैं।संविधान संशोधन विधेयक के मसौदे में कहा गया है, प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य लोकसभा, राज्यों की विधानसभाओं, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और केंद्र शासित प्रदेशों में महिलाओं (जिनमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाएं भी शामिल हैं) के लिए एक-तिहाई आरक्षण को लागू करना है। यह आरक्षण उस परिसीमन कवायद के माध्यम से लागू किया जाएगा, जो नवीनतम प्रकाशित जनगणना के जनसंख्या आंकड़ों पर आधारित होगा।प्रस्तावित संशोधन के तहत संविधान के अनुच्छेद 81 में बदलाव कर लोकसभा में राज्यों से अधिकतम 815 सदस्यों के चयन का प्रावधान किया गया है। वहीं, केंद्र शासित प्रदेशों से अधिकतम 35 सदस्यों को चुने जाने का प्रावधान रखा गया है, जिसकी व्यवस्था संसद कानून के माध्यम से तय करेगी। विधेयक में संविधान के अनुच्छेद 82 में भी संशोधन प्रस्तावित है। वर्तमान में इस अनुच्छेद के तहत परिसीमन की प्रक्रिया 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के आधार पर अनिवार्य रूप से की जानी है लेकिन प्रस्तावित संशोधन के जरिए इस प्रावधान को पूरी तरह हटाने की योजना है। इसका मतलब यह होगा कि अब परिसीमन प्रक्रिया को 2026-27 की जनगणना से पहले भी लागू किया जा सकेगा।नए प्रस्ताव के तहत अनुच्छेद 334ए में संशोधन कर यह व्यवस्था की जा रही है कि परिसीमन के तुरंत बाद ही महिला आरक्षण लागू किया जा सके, जिससे इसे अगली ही चुनाव प्रक्रिया में लागू करने का रास्ता साफ हो जाएगा।परिसीमन विधेयक 2026संविधान संशोधन विधेयक के साथ ही केंद्र सरकार परिसीमन विधेयक 2026 भी पेश करेगी, जो 2002 के डिलिमिटेशन एक्ट को निरस्त कर उसकी जगह लेगा। प्रस्तावित कानून के अनुसार, केंद्र सरकार राजपत्र अधिसूचना के जरिए एक नए परिसीमन आयोग का गठन करेगी। इस आयोग के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश होंगे। मुख्य चुनाव आयुक्त या उनके द्वारा नामित चुनाव आयुक्त सदस्य होंगे। संबंधित राज्यों के राज्य चुनाव आयुक्त भी सदस्य होंगे। हर राज्य में आयोग की सहायता के लिए 10 सदस्य नामित किए जाएंगे, जिनमें, पांच सांसद एवं पांच विधायक शामिल होंगे। हालांकि, इन सदस्यों को मतदान या निर्णय पर हस्ताक्षर का अधिकार नहीं होगा।प्रस्तावित विधेयक के अनुसार परिसीमन आयोग नवीनतम जनगणना के आंकड़ों के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण करेगा। वर्तमान में सीटों का आवंटन 1971 की जनगणना पर आधारित है। निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण 2001 की जनगणना के आधार पर किया गया है। नई व्यवस्था के तहत आयोग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लोकसभा सीटें आवंटित करेगा। राज्य विधानसभाओं की कुल सीट तय करेगा। अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित सीटों का निर्धारण करेगा। निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन करेगा। विधेयक के अनुसार परिसीमन आयोग द्वारा जारी आदेश, राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद कानून के समान प्रभावी होंगे। इन्हें किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकेगी।महिलाओं के लिए आरक्षण 15 साल तक लागू रहेगाविधेयक में लोकसभा और विधानसभाओं में एक-तिहाई सीट महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है। इसमें अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं के लिए भी आरक्षण शामिल होगा। यह आरक्षण रोटेशन के आधार पर लागू होगा, यानी अलग-अलग चुनावों में अलग-अलग सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। महिलाओं के लिए यह आरक्षण 15 साल तक लागू रहेगा। यानी 2029, 2034 और 2039 के लोकसभा चुनावों तक। आरक्षित सीटें हर चुनाव में बदलती रहेंगी, ताकि महिलाओं का हर जगह प्रतिनिधित्व मिल सके। वर्तमान लोकसभा या विधानसभा की संरचना उसके कार्यकाल समाप्त होने तक यथावत बनी रहेगी और इस दौरान होने वाले उपचुनाव पुराने परिसीमन के आधार पर ही कराए जाएंगे।
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