अपडेट::चीन और पाकिस्तान के खतरे से निपटने के लिए नौसेना बढ़ा रही ताकत: एडमिरल त्रिपाठी

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अपडेट::पीटीआई को दिए इंटरव्यू...में पीटीआई का नाम हटाया गया है इंटरव्यू नौसेना प्रमुख

अपडेट::चीन और पाकिस्तान के खतरे से निपटने के लिए नौसेना बढ़ा रही ताकत: एडमिरल त्रिपाठी

अपडेट::पीटीआई को दिए इंटरव्यू...में पीटीआई का नाम हटाया गया है इंटरव्यू

नौसेना प्रमुख ने नौसैनिक थिएटर कमान की वकालत की

कहा ऑपरेशन सिंदूर सबसे अहम उपलब्धि, पाकिस्तान को मजबूर किया

नई दिल्ली, एजेंसी। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने शनिवार को कहा कि भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर क्षेत्र में चीन और पाकिस्तान से मिलने वाली किसी भी 'दो मोर्चे' की चुनौती का सामना करने के लिए अपनी पनडुब्बी-रोधी युद्ध क्षमता, पानी के भीतर निगरानी और नेटवर्क-केंद्रित ऑपरेशंस में महत्वपूर्ण सुधार किया है।

रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का युग

एक साक्षात्कार में एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि नौसेना के प्रयास किसी विशेष राष्ट्र के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि भारत के समुद्री हितों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हैं। ये कोशिशें, स्थिर, स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में योगदान देने के लिए हैं। उनकी यह टिप्पणी हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की नौसेना की बढ़ती मौजूदगी और पाकिस्तान के साथ उसके बढ़ते समुद्री गठजोड़ के बीच आई है।

एडमिरल त्रिपाठी ने कहा, हम पूरी तरह से अवगत हैं कि हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और बाहरी शक्तियों की मौजूदगी भी बढ़ी है। हम सहयोग के युग से निकलकर तीव्र प्रतिस्पर्धा के युग में प्रवेश कर चुके हैं। एक पेशेवर समुद्री बल के रूप में, भारतीय नौसेना सभी क्षेत्रीय गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखती है। हमारा दृष्टिकोण पूरी तरह से क्षमता-आधारित और खतरों से अवगत रहने वाला है।

महत्वपूर्ण प्वाइंट्स पर नौसेना तैनात

बता दें कि हाल के समय में समुद्री क्षेत्र में पाकिस्तान और चीन के बीच सहयोग में तेजी आई है। एडमिरल त्रिपाठी ने बताया कि भारतीय नौसेना बदलते रणनीतिक माहौल का लगातार मूल्यांकन करती है और उसी के अनुरूप अपनी बल संरचना, परिचालन अवधारणाओं, तैनाती के तरीकों और तैयारी के स्तर को ढालती है।

चीन की पीएलए नौसेना के आधुनिकीकरण और पाकिस्तान को पनडुब्बी हस्तांतरण के सवाल पर उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना की मिशन-आधारित तैनाती महत्वपूर्ण 'चोक पॉइंट्स' (संकीर्ण समुद्री रास्ते) और शिपिंग लेन पर बनी रहती है, जो निरंतर निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करती है।

नौसैनिक थिएटर कमान की वकालत

एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने तीनों सेनाओं और तटरक्षक बल की क्षमताओं को मिलाकर एक विशेष नौसैनिक थिएटर कमान बनाने की जोरदार वकालत की। एडमिरल त्रिपाठी ने कहा, सेना के तीनों अंगों को एक साथ जोड़ने (थिएटराइजेशन) का मकसद सिर्फ संगठन के ढांचे को बदलना नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका असली उद्देश्य युद्ध लड़ने की हमारी क्षमता को और बेहतर बनाना तथा देश की सैन्य शक्ति को असल मायने में मजबूत करना होना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि जो भी नया ढांचा तैयार किया जाए, उसमें समुद्री चुनौतियों और हकीकतों का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए, साथ ही वह देश के साझा युद्ध कौशल के बड़े लक्ष्यों के साथ पूरी तरह मेल खाना चाहिए।

बदलाव के दौर से गुजर रहा युद्ध का तरीका

एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि युद्ध का तरीका ही बहुत बड़े बदलाव से गुजर रहा है। आज समुद्री युद्धक्षेत्र समुद्र तल से लेकर अंतरिक्ष तक फैला हुआ है, जबकि साइबर, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक, सूचना और ज्ञान के क्षेत्र भी उतने ही जरूरी हो गए हैं। त्रिपाठी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता और रूस यूक्रेन युद्ध का सबसे जरूरी सबक यह है कि समुद्री सुरक्षा सीधे आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय लचीलेपन से जुड़ी है।

ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को मजबूर किया

एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय नौसेना की उपलब्धियों में सबसे अहम ऑपरेशन सिंदूर था। इसने हमारी युद्ध की तैयारी, ऑपरेशनल रीच और प्रतिरोधक क्षमताओं को प्रदर्शित किया। उन्होंने कहा, कैरियर बैटल ग्रुप की तुरंत तैनाती और उत्तरी अरब सागर में हमारे फॉरवर्ड ऑपरेशनल पोस्चर ने पाकिस्तानी नेवी को हार्बर या मकरान तट के पास तक ही सीमित रहने के लिए मजबूर कर दिया। एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि इस आक्रामक रवैये ने नेवी की लड़ाकू ताकत को तेजी से तैनात करने और रणनीतिक माहौल को सफलतापूर्वक आकार देने की हमारी क्षमता की पुष्टि हुई। साथ ही शिपिंग जोखिमों में वृद्धि और बीमा प्रीमियम के बढ़ने के कारण पाकिस्तान की समुद्री अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव डाला। इस ऑपरेशन के दौरान प्रदर्शित तीनों सेनाओं के बीच तालमेल भी उतना ही महत्वपूर्ण था।

सामान्य प्रश्न

एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने किस ऑपरेशन को सबसे अहम बताया?
एडमिरल त्रिपाठी ने ऑपरेशन सिंदूर को सबसे अहम बताया।
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