चीनी सीसीटीवी कैमरे हटाने का कोई आदेश नहीं : केंद्र

Apr 06, 2026 08:16 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि देशभर में लगे चीनी सीसीटीवी कैमरे हटाने के लिए कोई औपचारिक आदेश नहीं दिया गया है। जस्टिस मेहता ने सरकार से सवाल किया कि यदि कैमरे हटाने का निर्णय लिया गया है, तो राज्यों को बजट और कैमरे कैसे मिलेंगे। कोर्ट ने गृह सचिव को अगली सुनवाई में उपस्थित रहने का निर्देश दिया।

चीनी सीसीटीवी कैमरे हटाने का कोई आदेश नहीं : केंद्र

केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में साफ किया कि देशभर में लगाए गए चीनी सीसीटीवी कैमरे हटाने के लिए कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं किया है। केंद्र सरकार ने यह जानकारी तब दी, जब सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया में प्रकाशित खबरों का हवाला देकर सरकार द्वारा सीसीटीवी कैमरे हटाने के बारे में सवाल किया। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने देशभर के थानों में सीसीटीवी लगाए जाने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सरकार से इस बारे में जानना चाहा। जस्टिस मेहता ने ‘हाल ही में प्रकाशित उन मीडिया रिपोर्ट का हवाला दिया, जिनमें बताया गया था कि पाकिस्तान से जुड़ा एक जासूसी नेटवर्क भारत में डाटा एकत्र करने के लिए सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल कर रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने खुद निर्देश दिए कि पड़ोसी देश चीन के बने कैमरे हटा दिए जाएं क्योंकि वे डाटा एकत्र करके उसे वहां भेज रहे हैं। जस्टिस मेहता ने कहा कि सरकार उन सभी कैमरों को हटाने के बारे में सोच रही है, तो फिर राज्यों को ये कैमरे लगाने के लिए बजट कहां से मिलेगा? और आपको इतनी बड़ी संख्या में कैमरे कहां से मिलेंगे? जस्टिस मेहता के इन सवालों का जवाब देते हुए, केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल राजकुमार बी. ठाकरे ने कहा कि केंद्र सरकार ने अभी तक कोई औपचारिक निर्देश जारी नहीं किए हैं।गृह सचिव को कोर्ट में मौजूद रहने का निर्देशसुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृह सचिव को मंगलवार को अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान उपस्थित रहने को कहा है ताकि देशभर में पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना के क्रियान्वयन में उनसे उचित सहायता प्राप्त की जा सके। पीठ ने यह आदेश पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों की कार्यक्षमता में कमी से संबंधित एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए दिया है।केरल के सिस्टम अन्य राज्य क्यों नहीं अपना रहेपीठ ने यह आदेश तब दिया जब मामले में न्याय मित्र की भूमिका निभा रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने पीठ को बताया कि अधिकांश राज्यों ने थानों में सीसीटीवी लगा लिए हैं और वे अब सेंट्रलाइज्ड डैशबोर्ड बनाने की प्रक्रिया में हैं। उन्होंने पीठ से कहा कि ‘केरल का सिस्टम सबसे अच्छा है, तो जस्टिस नाथ ने सवाल किया कि यदि केरल का सिस्टम सबसे अच्छा है, तो दूसरे राज्य भी उसे क्यों नहीं अपना सकते? पीठ ने कहा कि अधिकारियों को इस पर चर्चा करनी चाहिए।अगली बैठक में उच्च अधिकारी शामिल होंगे : केंद्रदूसरी तरफ अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ठाकरे ने पीठ से कहा कि इस योजना के लिए 60 फीसदी धन केंद्र सरकार मुहैया कराती है। पीठ को यह भी बताया कि अवर सचिव स्तर के अधिकारी ने उस बैठक में हिस्सा लिया था। इस पर पीठ ने अपनी नाराजगी जताई और केंद्र से कहा कि हम तो आदेश जारी कर रहे हैं और आप बैठक में अवर सचिव स्तर के अधिकारी भेज रहे हैं? इसके बाद केंद्र सरकार ने पीठ को भरोसा दिलाया कि आगामी बैठक में उच्च अधिकारी शामिल होंगे। इसके बाद पीठ ने मामले की सुनवाई मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी।

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