हाथियों को बचाने के लिए 1,158 किलोमीटर ट्रैक पर लगेंगे सेंसर
भारत सरकार ने हाथियों की मौत को रोकने के लिए 1,158 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक पर सेंसर लगाने की मंजूरी दी है। गजराज सिस्टम, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करता है, हाथियों की मौजूदगी का पता लगाता है और ट्रेन ड्राइवरों को तुरंत अलर्ट करता है। यह तकनीक पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे में लागू की जा रही है।

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। ट्रेन की टक्कर से होने वाली हाथियों की मौत की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार ने अति संवेदनशील 1,158 किलोमीटर रेलवे ट्रैक पर सेंसर लगाने की मंजूरी दी है। नई तकनीक से ऐसी दुर्घटनाएं शून्य स्तर पर पहुंचने की संभावना है। रेलवे बोर्ड ने गत वर्ष गजराज सिस्टम को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के सबसे खतरनाक रेलवे ट्रैक पर लगाने फैसला किया था। इस प्रोजेक्ट की सफलता के बाद रेलवे बोर्ड ने गजराज सिस्टम को संपूर्ण अति संवेदनशील 1,158 किलोमीटर रेलवे ट्रैक पर लगाने को मंजूरी दे दी है। बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह सिस्टम इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम (आईडीएस) पर आधारित है, जो ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) के जरिए काम करती है।
अधिकारी ने बताया कि यह तकनीक पटरियों के किनारे बिछी हुई ओएफसी का उपयोग करती है। इसमें लगे विशेष सेंसर जमीन में होने वाले कंपन को पकड़ते हैं। किसी हाथी के रेलवे ट्रैक के 500 मीटर के दायरे में आने पर सेंसर उसके पैरों की धमक को पहचान लेते हैं। सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग करता है ताकि यह अंतर स्पष्ट किया जा सके कि कंपन किसी जानवर का है, इंसान का या फिर किसी वाहन का है। हाथी की मौजूदगी की पुष्टि होने पर लोको पायलट (ट्रेन ड्राइवर), स्टेशन मास्टर और कंट्रोल रूम को तुरंत अलर्ट भेजा जाता है ताकि ट्रेन की गति कम की जा सके या उसे रोका जा सके। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस सिस्टम को 700 किलोमीटर के हाथी संवेदनशील कॉरिडोर में लागू करने की घोषणा की थी। इसके लिए 181 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। रेलवे बोर्ड ने हाल ही में इस योजना का विस्तार करते हुए 1,158 किलोमीटर ट्रैक को शामिल कर लिया है। अधिकारी ने बताया कि पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (असम राज्य) में सबसे अधिक रेल दुर्घटनाओं में हाथियों की मौत होती है। यहां गजराज सिस्टम लगाने का कार्य लगभग पूरा हो गया है। उन्होंने कहा कि अलीपुरद्वार डिवीजन (पश्चिम बंगाल) में ट्रैक कवर किए जा चुके हैं। दक्षिण पूर्व रेलवे झारखंड और ओडिशा के बीच हाथियों की आवाजाही सबसे अधिक है, यहां काम युद्धस्तर पर जारी है। यहां जंगलों वाले ट्रैक पर केबल बिछाने का काम चल रहा है। अधिकारी के मुताबिक, रांची डिवीजन के कुछ चुनिंदा पैच को गजराज सिस्टम से जोड़ा जा रहा है। पूर्व तटीय रेलवे (ओडिशा) में हाथियों की सुरक्षा के लिए रेलवे ने यहां बड़ा निवेश किया है। दक्षिण रेलवे (केरल और तमिलनाडु) की सीमा पर केबलिंग और सेंसर का सेटअप किया जा रहा है। रेलवे ने 14 राज्यों में लगभग 3,452 किलोमीटर लंबी रेलवे ट्रैक का सर्वेक्षण किया है, जो हाथियों के आवास या उनके आने-जाने वाले रास्तों से होकर गुजरती हैं। इसमें अत्यधिक संवेदनशील 1,158 किलोमीटर रेलवे ट्रैक हैं।

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