उच्च शिक्षा के लिए एकल नियामक स्थापित करने वाले विधेयक को मंजूरी

Dec 12, 2025 08:11 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उच्च शिक्षा के लिए एक नया नियामक निकाय स्थापित करने वाले विधेयक को मंजूरी दी है। यह विधेयक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और अन्य निकायों को प्रतिस्थापित करेगा। नया आयोग चिकित्सा और कानून कॉलेजों को नहीं शामिल करेगा। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा को बेहतर बनाना है।

उच्च शिक्षा के लिए एकल नियामक स्थापित करने वाले विधेयक को मंजूरी

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता/एजेंसी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने यूजीसी और एआईसीटीई जैसे निकायों की जगह उच्च शिक्षा नियामक निकाय स्थापित करने वाले विधेयक को शुक्रवार को मंजूरी दे दी। अधिकारियों ने बताया, प्रस्तावित विधेयक जिसे पहले भारत का उच्च शिक्षा आयोग (एचईसीआई) विधेयक नाम दिया गया था, अब विकसित भारत शिक्षा अधीक्षण विधेयक के नाम से जाना जाएगा। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) में प्रस्तावित एकल उच्च शिक्षा नियामक का उद्देश्य विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) को प्रतिस्थापित करना है। एक अधिकारी ने बताया, विकसित भारत शिक्षा अधीक्षण की स्थापना से संबंधित विधेयक को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है।

यूजीसी गैर-तकनीकी उच्च शिक्षा क्षेत्र की, जबकि एआईसीटीई तकनीकी शिक्षा की देखरेख करती है और एनसीटीई शिक्षकों की शिक्षा के लिए नियामक निकाय है। मेडिकल-लॉ कॉलेज दायरे में नहीं प्रस्तावित आयोग को उच्च शिक्षा के एकल नियामक के रूप में स्थापित किया जाएगा, लेकिन मेडिकल और लॉ कॉलेज इसके दायरे में नहीं आएंगे। इसके तीन प्रमुख कार्य प्रस्तावित हैं-विनियमन, मान्यता और व्यावसायिक मानक निर्धारण। वित्त पोषण, जिसे चौथा क्षेत्र माना जाता है, अभी तक नियामक के अधीन प्रस्तावित नहीं है। वित्त पोषण की स्वायत्तता प्रशासनिक मंत्रालय के पास प्रस्तावित है। --- कोयले से जुड़ी सुधार नीति को मंजूरी केंद्रीय कैबिनेट ने कोयला लिंकेज नीति में सुधार और कोल-एसईटीयू को नीतिगत मंजूरी दे दी है। वैष्णव ने कहा, भारत कोयले के मामले में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। 2020 में वाणिज्यिक खनन शुरू होने के बाद घरेलू कोयले की उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 2024-25 में भारत ने पहली बार एक वर्ष में 1 अरब टन से अधिक कोयला उत्पादन किया। कुल उत्पादन 1.048 अरब टन रहा। उन्होंने कहा कि कोयले का आयात खपत के प्रतिशत के रूप में लगातार घट रहा है। 2024-25 में आयात में 7.9% की कमी आई, जिससे लगभग 60,700 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई। रेल-कोयला साझेदारी पर उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष रेलवे के जरिए 823 मिलियन टन कोयले का परिवहन किया गया। घरेलू बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार इस समय रिकॉर्ड स्तर पर है। --- कोपरा की एमएसपी बढ़ाने पर मुहर कैबिनेट ने कोपरा की एमएसपी बढ़ाने को मंजूरी दी है। कैबिनेट कमिटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (सीसीईए) ने 2026 सीजन के लिए कोपरा के एमएसपी के लिए मंजूर किया है। केंद्रीय अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कैबिनेट ने मिलिंग खोपरा का एमएसपी बढ़ाकर 12,027 रुपये प्रति क्विंटल करने को मंजूरी दी है, जबकि बॉल खोपरा के लिए 12,500 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है। --- परमाणु क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ेगी केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी को अनुमति देने संबंधी प्रस्तावित विधेयक पर अपनी मुहर लगा दी। इसका उद्देश्य 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य को पूरा करना है। बैठक में ‘शांति’ (सस्टेनबल हारनेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया) विधेयक को मंजूरी दी गई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फरवरी में अपने बजट भाषण में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए खोलने की योजनाओं की घोषणा की थी। --- भारत-ओमान व्यापार समझौते को हरी झंडी केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और ओमान के बीच मुक्त व्यापार समझौते को मंजूरी दे दी है। सूत्रों के अनुसार, इस समझौते पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 17-18 दिसंबर को ओमान यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है। इस मुक्त व्यापार समझौते पर औपचारिक वार्ताएं नवंबर 2023 में शुरू हुई थीं और इस वर्ष समाप्त हो गईं। --- 71 कानून निरस्त किए जाएंगे मंत्रिमंडल ने ऐसे 71 कानूनों को निरस्त करने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी, जो अब उपयोगिता खो चुके हैं। अधिकारियों ने बताया कि इनमें से 65 संशोधन कानून हैं और 6 मूल कानून हैं। अधिकारियों के अनुसार, जिन कानूनों को हटाने का प्रस्ताव है, उनमें एक ब्रिटिश काल का कानून भी शामिल है। एक अधिकारी ने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य औपनिवेशिक कानूनों को निशाना बनाना नहीं, बल्कि उन अधिनियमों को हटाना है जिनकी अब कोई उपयोगिता नहीं रही।

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