
रविवार को बजट के दिन बाजार में तेज उठापटक की संभावना
केंद्रीय बजट 1 फरवरी को पेश होगा, और शेयर बाजार में अस्थिरता देखी जा रही है। पिछले 25 वर्षों के आंकड़ों से पता चलता है कि बजट के दिन निफ्टी में कई बार 1% से अधिक का उतार-चढ़ाव हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि बजट घोषणाएं निवेशकों को प्रभावित करती हैं और बाजार में तेजी या मंदी ला सकती हैं।
नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्रीय बजट आगामी रविवार, एक फरवरी को पेश होने वाला है और शेयर बाजार पहले से ही अस्थिरता का सामना कर रहा है। ऐतिहासिक आंकड़ों से पता चलता है कि बजट के दिन शेयर बाजार में बड़े उतार-चढ़ाव आम बात है और निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बजट ऐसा अवसर होता है जब सरकार की आर्थिक प्राथमिकताएं, टैक्स नीति, खर्च और घाटे से जुड़े संकेत एक साथ सामने आते हैं। यही कारण है कि बाजार तुरंत प्रतिक्रिया देता है और उतरा-चढ़ाव बढ़ जाते हैं। 25 साल का इतिहास दे रहा संकेत पिछले 25 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो साफ होता है कि बजट के दिन निफ्टी 50 में कई बार तेज हलचल देखी गई है।
इस अवधि में 16 बार निफ्टी 50 में 1% से ज्यादा का उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। कभी बजट घोषणाओं से बाजार में तेजी आई, तो कई बार निवेशकों को निराशा भी हाथ लगी। बजट के दिन अस्थिरता की वजह बजट के दिन शेयर बाजार में अस्थिरता के कई कारण होते हैं। पहला, निवेशक पहले से बजट को लेकर उम्मीदें बना लेते हैं। जैसे ही असली घोषणाएं सामने आती हैं, उम्मीद और हकीकत के अंतर पर बाजार प्रतिक्रिया देता है। दूसरा, टैक्स में बदलाव, सरकारी खर्च में बढ़ोतरी, सब्सिडी या किसी सेक्टर को राहत जैसी घोषणाएं सीधे कंपनियों की कमाई पर असर डालती हैं। तीसरा, विदेशी निवेशक भी बजट को भारत की आर्थिक दिशा का संकेत मानते हैं और उसी हिसाब से अपनी रणनीति बदलते हैं। बजट से पहले बाजार का मूड बजट 2026 से पहले बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है। हाल के सत्रों में निवेशकों ने मुनाफावसूली की है और कई बार प्रमुख सूचकांक दबाव में नजर आए हैं। निफ्टी और सेंसेक्स दोनों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, जिससे साफ है कि बाजार अभी किसी ठोस दिशा की तलाश में है। इन संकेतों का इंतजार -आयकर में संभावित बदलाव -सरकारी पूंजीगत खर्च -राजकोषीय घाटे का लक्ष्य -बुनियादी ढांचे और मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस किन क्षेत्रों पर रहेगी खास नजर बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर: टैक्स और क्रेडिट ग्रोथ से जुड़े संकेत अहम होते हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर और कैपिटल गुड्स: अगर सरकार खर्च बढ़ाती है तो इन शेयरों में तेजी दिख सकती है। एफएमसीजी और कंज्यूमर सेक्टर: ग्रामीण खर्च और टैक्स राहत से जुड़ी घोषणाएं असर डालती हैं। डिफेंस और मैन्युफैक्चरिंग: ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत से जुड़े ऐलान बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। निवेशकों के लिए रणनीति बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि बजट के दिन भावनाओं में बहकर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। इतिहास बताता है कि बजट के तुरंत बाद बाजार में तेज उतार-चढ़ाव जरूर आता है, लेकिन कई बार अगले कुछ सत्रों में स्थिति स्थिर भी हो जाती है। निवेशकों के लिए बेहतर रणनीति यह हो सकती है कि लंबी अवधि के लक्ष्य पर फोकस रखें, बजट के दिन अत्यधिक ट्रेडिंग से बचें, मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर भरोसा बनाए रखें।

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