सेना को चाहिए रॉकेट फोर्स, चीन और पाकिस्तान पहले ही बना चुके : सेना प्रमुख

Jan 13, 2026 08:27 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि भारत को रॉकेट-मिसाइल फोर्स की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि पिनाका रॉकेट सिस्टम की मारक क्षमता 120 किलोमीटर है और नए ब्रिगेडों के गठन की प्रक्रिया चल रही है। पाकिस्तान और चीन की गतिविधियों पर ध्यान देने की आवश्यकता है, और एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत किया जा रहा है।

सेना को चाहिए रॉकेट फोर्स, चीन और पाकिस्तान पहले ही बना चुके : सेना प्रमुख

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भविष्य की रक्षा तैयारियों पर बात करते हुए मंगलवार को कहा कि भारत को अब रॉकेट-मिसाइल फोर्स की जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश को ऐसी फोर्स चाहिए, जिसमें रॉकेट और मिसाइल दोनों की क्षमताएं मौजूद हों। चीन और पाकिस्तान पहले ही इस तरह की फोर्स खड़ी कर चुके हैं। सेना दिवस से पूर्व वार्षिक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए जनरल द्विवेदी ने बताया, भारत पिनाका रॉकेट सिस्टम को लगातार मजबूत कर रहा है, जिसकी मारक क्षमता 120 किलोमीटर तक है। इसके अलावा, प्रलय सहित अन्य रॉकेट और मिसाइल प्रणालियों पर भी काम चल रहा है।

मौजूदा हालात में रॉकेट और मिसाइल फोर्स भारत की जरूरत बन चुकी है तथा सरकार भी इस पर सहमत है। अब फैसला यह होना है कि यह फोर्स सेना के भीतर रहेगी या रक्षा मंत्रालय के सीधे नियंत्रण में होगी। सेना प्रमुख ने कहा, ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना ने अपनी तैयारियों में कई अहम बदलाव किए हैं। हाल ही में सेना की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (आईबीजी) के गठन को मंजूरी दी गई है। यह प्रक्रिया लंबे समय से लंबित थी, लेकिन अब इसकी राह साफ हो गई है। मेजर जनरल स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में सेना की 16 यूनिटों को मिलाकर ऐसे समूह बनाए जाएंगे, जिनके लिए आवश्यक दिशा-निर्देश तैयार किए जा रहे हैं। सेना प्रमुख ने कहा कि भारत की तैयारियां दीर्घकालिक हैं, क्योंकि हम जानते हैं कि युद्ध ऑपरेशन सिंदूर की तरह चार दिन में भी खत्म हो सकता है और रूस-यूक्रेन युद्ध की तरह चार साल तक भी चल सकता है। नई ब्रिगेडों से ताकत बढ़ेगी जनरल द्विवेदी ने बताया, भविष्य की युद्ध आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भैरव, शक्तिमान, दिव्यास्त्र और रुद्र ब्रिगेड जैसी इकाइयों के गठन की प्रक्रिया भी चल रही है। ट्रेनिंग कमांड का विस्तार किया जा रहा है, ताकि सेना आने वाली चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सके। सेना प्रमुख ने कहा कि युद्धक तैयारियों को मजबूत करने के लिए तैनाती व्यवस्था में भी नए सिरे से बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे सेना को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। एयर डिफेंस सिस्टम मजबूत हो रहे ड्रोन से जुड़ी चुनौतियों पर जनरल द्विवेदी ने कहा, सेना एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत कर रही है। ड्रोन की पहचान के लिए अब छोटे और आधुनिक रडार लगाए जा रहे हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भविष्य में कितने ड्रोन की जरूरत होगी, यह अभी कहना मुश्किल है। लेकिन वर्तमान में पाकिस्तान की सीमा पर करीब 10 हजार ड्रोन सक्रिय हैं और आगे यह संख्या 10 हजार से बढ़कर एक लाख तक भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए सेना के भीतर टेक्नो-कमांडर तैयार किए जा रहे हैं और स्वदेशी ड्रोन निर्माण क्षमता भी बढ़ाई जा रही है। आज सेना की हर कमांड के पास करीब 5 हजार ड्रोन बनाने की क्षमता है। हाल ही में 100 किलोमीटर तक मार करने वाले ड्रोन का भी सफल परीक्षण किया गया है। --------- पाकिस्तान अपने ड्रोन पर लगाम लगाए सेना प्रमुख द्विवेदी ने कहा, भारत ने पाकिस्तान से उसकी ओर से हो रही ड्रोन घुसपैठ को तुरंत रोकने को कहा है। उन्होंने बताया कि मंगलवार को भारत और पाकिस्तान के डीजीएमओ के बीच फोन पर बातचीत हुई, जिसमें यह मुद्दा स्पष्ट रूप से उठाया गया। सेना प्रमुख के अनुसार, शनिवार से अब तक कम से कम आठ ड्रोन भारतीय सीमा के पास देखे गए हैं। रविवार शाम जम्मू क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट पांच ड्रोन घुसपैठ की घटनाएं सामने आईं। जनरल द्विवेदी ने कहा कि इन ड्रोन का मकसद भारतीय सेना की गतिविधियों पर नजर रखना या किसी तरह की ढील और कमजोरियों का पता लगाना हो सकता है, ताकि आतंकियों की घुसपैठ की संभावना टटोली जा सके। एक अन्य घटना का जिक्र करते हुए सेना सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार को पाकिस्तान की ओर से आए एक ड्रोन के जरिए हथियार गिराए जाने की आशंका है। तलाशी अभियान के दौरान दो पिस्तौल, तीन मैगजीन, 16 गोलियां और एक ग्रेनेड बरामद किए गए। सेना प्रमुख ने दो टूक कहा, यह मामला डीजीएमओ स्तर की बातचीत में उठाया गया है और साफ कर दिया गया है कि यह हमारे लिए अस्वीकार्य है। पाकिस्तान से कहा गया है कि वह ऐसी गतिविधियों पर तुरंत लगाम लगाए। --------- पाक में आठ आतंकी शिविर सक्रिय, दुस्साहस किया तो जवाब मिलेगा जनरल द्विवेदी ने कहा, ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान में आठ आतंकी शिविर फिर से सक्रिय हो गए हैं। इनमें से छह शिविर नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार और दो अंतरराष्ट्रीय सीमा के उस पार संचालित हो रहे हैं। इन शिविरों में 100 से 150 आतंकियों के मौजूद होने की जानकारी है। भारतीय सेना इनकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखे हुए है और किसी भी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है। उन्होंने बताया कि ऐसी सूचनाएं मिल रही हैं कि पाकिस्तान एक बार फिर पूरी तैयारी में जुटा है और कट्टरपंथियों को बढ़ावा दे रहा है। हालांकि, वित्तीय सहायता को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन भारतीय सेना पूरी तरह सतर्क है। घाटी में 36 आतंकी मरे, इनमें 65% पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने कहा, कश्मीर में हालात संवेदनशील बने हुए हैं, लेकिन स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। फिलहाल सेना की तैनाती में किसी भी तरह की कमी नहीं की गई है। सेना प्रमुख ने बताया कि वर्ष 2025 में जम्मू-कश्मीर में कुल 36 आतंकवादी मारे गए, जिनमें करीब 65 प्रतिशत पाकिस्तानी थे। इनमें पहलगाम हमले से जुड़े आतंकवादी भी शामिल हैं। परमाणु हमले की धमकी राजनेताओं ने दी, पाक सेना ने नहीं इस सवाल पर कि क्या ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की सेना ने परमाणु हमले की धमकी दी थी, सेना प्रमुख ने कहा कि डीजीएमओ स्तर की बातचीत में इस तरह का कोई मुद्दा नहीं उठा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी बातें वहां के राजनीतिज्ञों या आम जनता की ओर से कही गई थीं, सेना की तरफ से नहीं। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एलओसी पर भारतीय सेना की फायरिंग में पाकिस्तान के करीब 100 जवान मारे गए। उस समय सेना की जमीनी तैयारियां मजबूत थीं और बड़े पैमाने पर बलों को सक्रिय किया गया था। शक्सगाम घाटी पर चीन के दावे को खारिज किया सेना प्रमुख ने कहा, चीन से लगी एलएसी पर हालात फिलहाल स्थिर हैं, लेकिन लगातार निगरानी की जरूरत बनी हुई है। विभिन्न तंत्रों के माध्यम से विश्वास बहाली के प्रयास जारी हैं। सीमा निर्धारण और प्रबंधन से जुड़े मुद्दों के लिए दो अलग-अलग विशेषज्ञ समूह काम कर रहे हैं। शक्सगाम घाटी को लेकर चीन के दावों पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, विदेश मंत्रालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि भारत, चीन और पाकिस्तान के बीच हुई संधि को स्वीकार नहीं करता। इसलिए शक्सगाम घाटी में किसी भी चीनी गतिविधि को मान्यता नहीं दी जाती। बता दें कि पाक ने वर्ष 1963 में अवैध रूप से कब्जाए गए भारतीय क्षेत्र में से शक्सगाम घाटी के 5180 वर्ग किलोमीटर हिस्से को चीन को सौंप दिया था। भारत ने चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को कभी मान्यता नहीं दी। शक्सगाम घाटी काराकोरम पर्वत शृंखला में स्थित एक दुर्गम और ऊंचाई वाला क्षेत्र है, जो लद्दाख के उत्तर में पड़ता है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घाटी चीन के शिंजियांग क्षेत्र को पीओके के बाल्टिस्तान क्षेत्र से जोड़ने वाले क्षेत्र के निकट है। पाकिस्तान-बांग्लादेश के मौजूदा संबंधों पर नजर पाकिस्तान द्वारा बांग्लादेश को हथियार दिए जाने से जुड़े सवाल पर सेना प्रमुख ने कहा कि यह देखना महत्वपूर्ण है कि ऐसे फैसले कौन सी सरकार ले रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ये फैसले चार-पांच वर्षों के लिए हैं या सिर्फ चार-पांच महीनों के लिए। उनके अनुसार ये फैसले स्थायी सरकार के नहीं लगते। उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश की सेनाओं के बीच लगातार संवाद जारी है और बांग्लादेश की सेना भारत के खिलाफ नहीं है। क्षमता विकास के मामले में वे अपने फैसले ले सकते हैं, लेकिन भारत पूरी स्थिति पर नजर रखे हुए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के सैन्य संबंधों में किसी तरह की कमी नहीं आई है। ----- सेना को मजबूत महिला अधिकारियों की जरूरत सेना प्रमुख द्विवेदी ने कहा, भारतीय सेना को मजबूत महिला अधिकारियों की आवश्यकता है, ऐसी अधिकारी जो काली माता के रूप का प्रतीक हों। उन्होंने कहा कि सेना लैंगिक समानता के बजाय लैंगिक तटस्थता की दिशा में आगे बढ़ रही है और इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं को किसी भी रूप में कमजोर नहीं माना जा सकता। जनरल द्विवेदी ने कहा कि सेना का दृष्टिकोण समाज की व्यापक संरचनाओं से अलग है, जो अब भी काफी हद तक लैंगिक आधार पर संगठित हैं। उन्होंने कहा कि यदि आज के समाज को देखा जाए तो अलग-अलग लड़कियों और लड़कों के स्कूल, कॉलेज और उनके लिए अलग कानून मौजूद हैं। लेकिन जहां तक सेना का सवाल है, उसका फोकस लैंगिक समानता नहीं, बल्कि लैंगिक तटस्थता पर है। सेना प्रमुख ने माना कि मौजूदा चिकित्सा मानकों और संचालन से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों के कारण पूर्ण लैंगिक समानता हासिल करना अभी कठिन है। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ महिला अधिकारियों ने स्वयं कुछ विशेष युद्ध भूमिकाओं में वर्दी और शारीरिक मानकों को पूरा करने को लेकर चिंता जताई है। यह टिप्पणी उन्होंने उस सवाल के जवाब में की, जिसमें उनसे पूछा गया था कि सेना की युद्धक शाखाओं का नेतृत्व महिला अधिकारियों के हाथों कब सौंपा जाएगा।

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