पुस्तक मेला: पुस्तक मेला में सैन्य साजो सामान देख युवा हो रहे रोमांचित, खोज रहे ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी किताबें
नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में इस बार भारतीय सशस्त्र बलों की विरासत और सैन्य साहित्य को प्रमुखता दी गई है। मेले में युद्धपोतों की डमी और सैन्य उपकरणों के साथ लोग सेल्फी ले रहे हैं। यहां 500 से अधिक सैन्य विषयक किताबें और विशेष गतिविधियां दर्शकों को आकर्षित कर रही हैं।

सेना के जवानों, युद्धपोत की डमी, रखे गए उपकरणों के साथ खिंचवा रहे फोटो, ले रहे सेल्फी -विश्व पुस्तक मेले में सशस्त्र बलों की विरासत और सैन्य साहित्य को प्रमुखता नई दिल्ली। अभिनव उपाध्याय नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला में इस बार किताबों के बीच देश की सैन्य ताकत भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। जैसे ही लोग मेला परिसर में प्रवेश कर रहे हैं सशस्त्र बलों की मौजूदगी, युद्धपोतों की डमी और अत्याधुनिक सैन्य साजो-सामान देखकर रोमांच अपने आप दर्शकों के चेहरे पर छलक पड़ता है। बच्चे हों या युवा, हर कोई इन दृश्यों को कैमरे में कैद करने को उत्सुक दिख रहा है।
कहीं सैनिकों के साथ फोटो खिंचवाए जा रहे हैं तो कहीं युद्ध उपकरणों के सामने सेल्फी ली जा रही है। सशस्त्र बलों की गौरवशाली विरासत और सैन्य साहित्य ने इस पुस्तक मेले को देशभक्ति और जिज्ञासा से भर दिया है। कई प्रकाशकों से युवा ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी किताबें खोजते हुए देखे गए। 53वें नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले 2026 में इस बार सिर्फ किताबें ही नहीं, बल्कि भारतीय सशस्त्र बलों का शौर्य, साहस और बलिदान भी लोगों को रोमांचित कर रहा है। ‘शांति के लिए युद्ध’ थीम पर आधारित इस मेले में भारतीय सेना की विरासत, सैन्य साहित्य और असली सैन्य साजो-सामान दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। मेले में लगभग 1000 वर्गफुट में फैला भारतीय सेना का विशेष पवेलियन किसी जीवंत सैन्य यात्रा जैसा अनुभव कराता है। यहां सेना के ऐतिहासिक दस्तावेज, युद्ध की प्रत्यक्ष कहानियां, ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियां और इंटरैक्टिव गतिविधियां दर्शकों को रोमांच से भर देती हैं। आगंतुक सेना के गौरवशाली इतिहास को पढ़ने, सुनने और महसूस करने का अनूठा अवसर पा रहे हैं। मेले में आए पश्चिम विहार निवासी वन ने बताया कि मैंने कभी सेना में प्रयोग होने वाले ड्रोन नहीं देखा था लेकिन मुझे बताया गया कि यहां प्रदर्शित ड्रोन ऑपरेशन सिंदूर में सर्विलांस के लिए प्रयोग किए जा चुके हैं। यहां पर जो उपकरण दिखाई दिए उनके साथ मैंने सेल्फी भी ली है। इसी तरह का कहना था मेरठ से आए प्रवेश सिंह का, उन्होंने कहा कि यहां आकर पता चलता है कि सैनिकों का जीवन आसान नहीं है। मेरा शुरू से सेना में जाने का सपना था। यहां आकर मुझे गर्व हो रहा है। मैं सैनिकों से मिल पा रहा हूं। सेना के साजो सामान देख पा रहा हूं। सेना, नौसेना और वायुसेना पर आधारित 500 से अधिक किताबों का विशाल संग्रह नेशनल बुक ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे के अनुसार, यह संस्करण भारतीय सशस्त्र बलों की राष्ट्र निर्माण में भूमिका को उजागर करने का प्रयास है और युवाओं को युद्धभूमि से आगे जाकर कर्तव्य, अनुशासन और शांति के मूल्यों से जोड़ता है। मेले में सेना, नौसेना और वायुसेना पर आधारित 500 से अधिक किताबों का विशाल संग्रह है, जिसमें सैन्य इतिहास, वीरों की जीवनियां, संस्मरण और रणनीतिक अध्ययन शामिल हैं। साहित्य के साथ-साथ अर्जुन टैंक और विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत की भव्य प्रतिकृति ने भी दर्शकों की भीड़ खींच ली है, जहां लोग सेल्फी लेते नजर आ रहे हैं। इसके अलावा 21 परमवीर चक्र विजेताओं को समर्पित विशेष खंड, 100 से अधिक रक्षा विषयक परिचर्चाएं और पुस्तक विमोचन इस मेले को शौर्य और ज्ञान का अद्भुत संगम बना रहे हैं। पुस्तक मेला में प्रभात प्रकाशन के प्रमुख प्रभात कुमार ने कहा कि पहली बार पुस्तक मेला में इस तरह की थीम रखी गई है। इससे दर्शकों में खासकर युवाओं में जबरदस्त रोमांच है। हमारे यहां हिंदी की सर्वाधिक पुस्तकें सैन्य योद्धाओं से जुड़ी हैं। उनकी कहानियों से जुड़ी हैं और दर्शक इसमें रुचि ले रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि हमारे बच्चे सैनिकों का सम्मान कर रहे हैं। युवा पीढ़ी उनके साथ फोटो खिंचवा रही है। यह सेना का सम्मान है। अब युवा ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी किताबें खोजकर पढ़ना चाहते हैं। इससे जुड़ी किताबों के बारे में पूछताछ कर रहे हैं। ------- ऑपरेशन चटनी के बारे सुन रोमांचित हुए दर्शक थीम पवेलियन में आयोजित पैनल चर्चा में भारतीय नौसेना की ऐतिहासिक भूमिका और वर्तमान समुद्री जिम्मेदारियों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। ‘नियम-आधारित व्यवस्था के निर्माण में भारतीय नौसेना की भूमिका’ विषय पर हुई इस चर्चा में गोवा मुक्ति से लेकर आज की समुद्री सुरक्षा चुनौतियों तक नौसेना के योगदान को रेखांकित किया गया। लेफ्टिनेंट जीतवितेश सहारण ने 1961 में गोवा मुक्ति में भारतीय नौसेना की निर्णायक भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने ‘ऑपरेशन चटनी’ को भारतीय इतिहास का सबसे साहसिक और प्रभावशाली नौसैनिक अभियान बताया। उन्होंने कहा कि यह भारत का पहला उभयचर नौसैनिक अभियान था, जो सुबह लगभग पांच बजे शुरू होकर दोपहर तक सफलतापूर्वक पूरा हो गया। उन्होंने बताया कि किस तरह पुर्तगाली सेना ने आत्मसमर्पण का संकेत देते हुए भी भारतीय कमांडो पर गोलीबारी की, जिससे स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई। इस अभियान में सात भारतीय नौसैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आई कूटनीतिक चुनौतियों का भी उल्लेख किया और बताया कि किस प्रकार सोवियत संघ के समर्थन से भारत ने संयुक्त राष्ट्र में दबाव का सामना किया। लेफ्टिनेंट कमांडर अनुपमा तपलियाल ने आधुनिक दौर में नौसेना की भूमिका पर बात करते हुए समुद्री डकैती, तस्करी और अवैध मछली पकड़ने जैसी चुनौतियों का उल्लेख किया। उन्होंने 2019 में शुरू किए गए ‘ऑपरेशन संकल्प’ को समुद्री सुरक्षा का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया।
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