
भारत-ब्रिटेन एफटीए अनिवार्य लाइसेंसिंग के उपयोग पर प्रतिबंध नहीं लगाता: जितिन प्रसाद
- राज्यसभा में लिखित जवाब में दी गई यह जानकारी नई दिल्ली,एजेंसी।
भारत और ब्रिटेन के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में भारत के अनिवार्य लाइसेंसिंग (कंपल्सरी लाइसेंसिंग-सीएल) के उपयोग पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। यह बात राज्यसभा में शुक्रवार को दी गई लिखित जानकारी में कही गई। वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि यह समझौता अनिवार्य लाइसेंस जारी करने में कोई प्रक्रियात्मक देरी, पहले बातचीत की अनिवार्यता या अतिरिक्त शर्तें नहीं जोड़ता, जो इसके उपयोग को सीमित कर सकें। अनिवार्य लाइसेंसिंग एक महत्वपूर्ण उपकरण है, जो आपात स्थिति में जीवन रक्षक दवाओं और तकनीकों तक पहुंच बनाने में मदद करता है। मजबूत सुरक्षा उपाय किए गए मंत्री ने आगे बताया कि भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) में मजबूत सुरक्षा उपाय शामिल किए गए हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों सहित अनिवार्य लाइसेंसिंग पर भारत की नीतिगत स्वतंत्रता को पूरी तरह सुरक्षित रखते हैं।
इस समझौते से भारतीय कंपनियों को बड़ा फायदा होगा। भारत को ब्रिटेन के सार्वजनिक खरीद बाजार तक गारंटीड और भेदभाव रहित पहुंच मिलेगी, जिसकी सालाना कीमत 90 अरब पाउंड (लगभग 122 अरब अमेरिकी डॉलर) से अधिक है। इसमें ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) जैसी प्रमुख संस्थाएं भी शामिल हैं। प्रसाद ने कहा कि यह भारतीय कंपनियों, विशेषकर आईटी, दवा और सेवा क्षेत्र के लिए बहुत बड़ी संभावना है।

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