एक क्लिक पर आतंकी और अपराधियों की कुंडली खोलेगा डाटाबेस
भारत ने आतंकवाद और अपराध पर नियंत्रण के लिए डाटाबेस को मजबूत करने की पहल की है। केंद्रीय एजेंसियों द्वारा विभिन्न डाटा बैंकों को एकीकृत किया जा रहा है। इसमें फिंगर प्रिंट, डीएनए और अन्य जानकारियों का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे आतंकी घटनाओं का विश्लेषण संभव होगा और सुरक्षा ग्रिड को मजबूत किया जाएगा।

पंकज कुमार पाण्डेय नई दिल्ली। डाटाबेस के जरिये एक क्लिक में आतंकी और अपराधियों की कुंडली खुल जाएगी। आतंक और अपराध पर काबू पाने के लिए केंद्रीय एजेंसियां लगातार डाटाबैंक को मजबूत करने की मुहिम में जुटी हैं। अब तक फिंगर प्रिंट, डीएनए, चेहरे से पहचान सहित करीब दर्जन भर डाटा बैंक अलग-अलग केंद्र और राज्य की एजेंसियों द्वारा तैयार किए गए हैं। अब इन्हें एकीकृत करने की कवायद चल रही है। जांच एजेंसियां एआई के उपयोग में दुनिया में अग्रणी अमेरिका की जांच एजेंसी एफबीआई के मॉडल को भी अपना रही हैं। एक अधिकारी ने कहा, एफबीआई का एक मेटाबेस है, इसमें शुरुआत में 21 डाटाबेस शामिल थे, जिनमें व्यक्तिगत अपराधियों और आपराधिक संगठनों के सदस्यों के 16 मिलियन सक्रिय रिकॉर्ड वाली फाइलें थीं।
इस डाटाबेस के विश्लेषण से प्रतिदिन औसतन 14 मिलियन प्रश्नों का उत्तर देना संभव होता है। एफबीआई के अलावा, एनसीआईसी 90,000 से अधिक आपराधिक न्याय पहुंच केंद्रों को सेवाएं प्रदान करता है, जिनमें अदालतें, अभियोजक, सुधार गृह और अन्य शामिल हैं। इस मामले में दुनिया के श्रेष्ठ कार्यों को अपनाया जाएगा। भारत भी इसी पैटर्न पर आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकारों के अनुभवों को भी साझा किया जा रहा है। कुछ राज्य सरकारों ने डाटाबेस और एनालिसिस में अच्छा काम किया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ‘वन नेशन, वन डाटा रिपॉजिटरी’ की बात कर चुके हैं। इस कार्ययोजना पर एजेंसियां काफी आगे बढ़ चुकी हैं। अलग-अलग विभागों में बिखरा डेटा एक राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में हर सुरक्षा इकाई को उपलब्ध कराने की मुहिम चल रही है। इससे आतंकी घटनाओं के पैटर्न को समझने से वैज्ञानिक साक्ष्य आधारित अभियोजन संभव होगा। -- जवाबी रणनीति तैयार की जाएगी एआई के जरिये पूरे डाटाबेस का विश्लेषण करके हर आतंकी घटना का विस्तृत ब्योरा भी एजेंसियों के लिए उपलब्ध होगा। जिसे केस स्टडी के तौर पर एजेंसियों को उपलब्ध कराया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे आतंकी गुटों की भविष्य की रणनीति, बदलते पैटर्न और उनका मूवमेंट सहित उनके सभी शेल्टर की पहचान करके जवाबी रणनीति तैयार की जा सकेगी। 17741 पुलिस स्टेशन सीसीटीएनएस से जुड़े देश के लगभग शत-प्रतिशत यानी 17741 पुलिस स्टेशन सीसीटीएनएस से जुड़े हुए हैं, जिससे उनका ऑनलाइन डाटा उपलब्ध हो जाता है। आईसीजीएस-2, वन डेटा–वन एंट्री की अवधारणा वाला एक नेक्स्ट-जेन डाटा सेविंग सिस्टम के रूप में उभर रहा है। 22 हजार अदालतों, ई-प्रिजन के माध्यम से लगभग 2 करोड़ 20 लाख कैदियों और ई-प्रॉसीक्यूशन के माध्यम से 2 करोड़ अभियोजनों के डाटा के अलावा ई-फॉरेंसिक के माध्यम से 31 लाख सैंपलों के परिणाम और नफीस के माध्यम से 1 करोड़ 21 लाख फिंगरप्रिंट्स का रिकॉर्ड एक क्लिक पर उपलब्ध है। हाल ही में निडम्स के जरिये विस्फोटकों का डाटा भी इसमें शामिल हो गया है। मजबूत सुरक्षा ग्रिड तैयार किया जाएगा। एजेंसियों का कहना है कि मजबूत डाटाबेस और एआई की मदद से एक मजबूत सुरक्षा ग्रिड तैयार किया जाएगा। जिससे खुफिया एजेंसियों से लेकर सुरक्षा बलों की सभी इकाइयों को अपने सूचना तंत्र, रणनीति और ऑपरेशन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। एनआईए, एनएसजी ने खास डाटाबैंक तैयार किया है। इसमें हथियार ई-डाटाबेस, अपराध मैन्युअल, संगठित अपराध डाटाबेस के अलावा आईईडी का डाटा शामिल है। नफीस का अपना अलग डाटा है इसका इस्तेमाल भी देशभर की एजेंसियां कर रही हैं। नैटग्रिड का अपना डाटा कवच है। सीबीआई भी कई अलग-अलग तरह का डाटाबेस तैयार कर रही है।

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