
भारत ने पेरू-चिली के साथ तेज की व्यापार समझौता वार्ता
संक्षेप: भारत अपने आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को लैटिन अमेरिकी देशों के साथ मजबूत करने के लिए तेजी से कदम उठा रहा है। पेरू के साथ व्यापार समझौते की वार्ता आगे बढ़ी है और अगले वर्ष के अंत तक समझौते पूरे होने की संभावना है। चिली के साथ भी समयबद्ध तरीके से समझौता पूरा करने पर सहमति बनी है।
नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। भारत लैटिन अमेरिकी देशों के साथ अपने आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। भारत की तरफ से पेरू और चिली के साथ व्यापार समझौतों को लेकर चल रही चर्चा अब काफी आगे बढ़ गई है। संभावना जताई जा रही है कि अगले वर्ष दोनों देशों के साथ समझौते पूरे होंगे। भारत–पेरू व्यापार समझौते की 9वीं दौर की बैठक पेरू की राजधानी लीमा में पांच नवंबर तक चली। बैठक में दोनों देशों के बीच कई अहम विषयों पर सकारात्मक प्रगति हुई। दोनों पक्षों ने वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार, उत्पत्ति के नियम, तकनीकी व्यापार बाधाएं, सीमा शुल्क प्रक्रिया, विवाद समाधान और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे मुद्दों पर चर्चा की।

बैठक में पेरू की विदेश व्यापार और पर्यटन मंत्री टेरेसा स्टेला मेरा गोमेज, उपमंत्री सेजर ऑगस्तो लियोना सिल्वा और भारत की तरफ से राजदूत विश्वास विदु, भारतीय प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख विमल आनंद (संयुक्त सचिव और मुख्य वार्ताकार) उपस्थित रहे। मंत्री गोमेज ने कहा कि पेरू वार्ता को जल्द पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं, भारत ने बताया कि क्रिटिकल मिनरल्स, दवा उद्योग, ऑटोमोबाइल, वस्त्र और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करने से दोनों पक्षों को लाभ होगा। ऐसे में दोनों पक्षों ने यह तय किया कि अगले दौर की वार्ता से पहले लंबित मुद्दों पर चर्चा के लिए शिखर सम्मेलन आयोजित की जाएगा। साथ ही, तय हुआ कि अगले दौर की बैठक जनवरी में दिल्ली में आयोजित होगी। ------------ भारत-चिली समझौता समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर सहमत पेरू से पहले भारत–चिली व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते की तीसरी दौर की वार्ता 30 अक्टूबर तक चिली की राजधानी सैंटियागो में हुई। इसमें वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, निवेश संवर्धन, बौद्धिक संपदा अधिकार, व्यापार से जुड़ी तकनीकी बाधाओं, आर्थिक सहयोग और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे विषयों पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने वार्ता को जल्द और समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर सहमति जताई, जिससे बाजार तक पहुंच आसान हो सके। साथ ही, आपूर्ति श्रृंखला मजबूत हो और आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा मिल सके।

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