थोक महंगाई एक माह में दोगुना उछली
नई दिल्ली। विशेष संवाददाता पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर अब भारत की थोक महंगाई पर भी साफ दिखने लगा है। अप्रैल 2026 में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई दर बढ़कर 8.30 प्रतिशत पहुंच गई, जो पिछले 42 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। मार्च में यह दर 3.88 प्रतिशत थी। यानी सिर्फ एक महीने में इनमें दोगुना उछाल आया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2022 (8.39 प्रतिशत) के बाद पहली बार थोक महंगाई आठ फीसदी के पार दर्ज की गई है। महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह ईंधन और बिजली की कीमतों में तेजी रही।
अप्रैल में इस श्रेणी की महंगाई दर 24.71 प्रतिशत रही, जबकि मार्च में यह सिर्फ 1.05 प्रतिशत थी।पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। अप्रैल में पेट्रोल की थोक महंगाई दर 32.40 प्रतिशत रही, जबकि मार्च में यह 2.50 प्रतिशत थी। कच्चे तेल एवं प्राकृतिक गैस की थोक महंगाई दर 67.18 प्रतिशत दर्ज की गई। इस वर्ग में कच्चा तेल 88 फीसदी महंगा हुआ। तिलहनों के दाम भी 22.24 प्रतिशत और खनिजों के 12.15 प्रतिशत बढ़े। वहीं, खाद्य वस्तुओं की थोक महंगाई दर 1.98 प्रतिशत रही, जो मार्च में1.90 प्रतिशत थी।
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