चीन सीमा पर भारत के प्रथम गावों में बिछा 2500 किमी फीडर सड़कों का जाल
चीन सीमा पर भारत के प्रथम गावों में बिछा 2500 किमी फीडर सड़कों का जाल-हिमालय के दुर्गम गांवों में फिर लौट रही रौनक, बदला सरहदों का भूगोलनई दिल्ली, अरविंद सिंहहिमालय की दुर्गम सरहदों पर बसे जिन गांवों...

चीन सीमा पर भारत के प्रथम गावों में बिछा 2500 किमी फीडर सड़कों का जाल-हिमालय के दुर्गम गांवों में फिर लौट रही रौनक, बदला सरहदों का भूगोल नई दिल्ली, अरविंद सिंह
हिमालय की दुर्गम सरहदों पर बसे जिन गांवों को कभी देश का आखिरी गांव कहकर भुला दिया जाता था, आज वही गांव देश की सुरक्षा और पर्यटन के प्रवेश द्वार बन रहे हैं। केंद्र सरकार के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (वीवीपी) के तहत चीन सीमा से सटे इलाकों में फीडर सड़कों का जाल सिर्फ डामर की पट्टियां नहीं, बल्कि सामरिक अभेद्यता की गारंटी बन रहा है। ये सड़कें नागरिकों के लिए जीवनरेखा और आपातकाल में सेना के लिए रणपथ साबित हो रही हैं।
योजना की शुरुआत
सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वीवीपी की शुरूआत अप्रैल 2023 में अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती गांव किबिथू व उत्तराखंड के माणा गांव से की थी। इसका मुख्य उद्देश्य चीन की सीमा से सटे 4 राज्यों हिमाचल, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के गांवों का बुनियादी ढांच सहित राशि बिजली, पानी और पर्यटन विकास कर कायाकल्प करना है। मई 2026 की ताजा प्रगति रिपोर्ट के अनुसार इस योजना के तहत फीडर सड़कों और संपर्क मार्गों के तहत लगभग 2,500 किलोमीटर (4,800 करोड़ का निवेश) से अधिक नई सड़कों का निर्माण और चौड़ीकरण किया जा चुका है।
प्राथमिकता और विकास
अधिकारी ने बताया कि योजना के पहले चरण में 662 गांवों को प्राथमिकता दी गई है, जबकि पूरी योजना में कुल 2,967 गांवों को शामिल किया गया है। इन दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाली लगभग 1.42 लाख की आबादी को सीधे तौर पर मुख्यधारा से जोड़ा गया है। सरकार सड़कों के साथ-साथ इन गांवों में होमस्टे बनाने के लिए आर्थिक मदद दे रही है, ताकि बॉर्डर टूरिज्म को बढ़ावा मिले। अंतिम छोर तक 4जी कनेक्टिविटी और 24 घंटे सौर ऊर्जा सुनिश्चित की जा रही है, जिससे वर्क फ्रॉम माउंटेन का सपना सच हो रहा है। सुविधाओं के पहुंचने से अब शहरों की ओर गए लोग वापस आकर अपने गांवों में पर्यटन व्यवसाय शुरू कर रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय
बॉक्स विशेषज्ञों के अनुसार चीन अपनी सीमा की तरफ मॉडल विलेज बसा चुका है। भारत का वाइब्रेंट विलेज उसका करारा जवाब है। फीडर सड़कें सेना के भारी वाहनों और रसद को एलएसी तक मिनटों में पहुंचाने में सक्षम बनाती हैं। सीमा पर आबादी का होना सेना के लिए आंख और कान का काम करता है। खाली गांव सामरिक दृष्टि से असुरक्षित होते हैं।
योजना का दूसरा चरण
केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में इस योजना के दूसरे चरण (वीवीपी-2) के लिए 6,839 करोड़ का अतिरिक्त बजट आवंटित किया है। इसका मुख्य फोकस अब लद्दाख और अरुणाचल के उन ब्लैक स्पॉट पर है जहाँ अभी तक पक्की सड़कें नहीं पहुँच पाई थीं।
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