
संयुक्त राष्ट्र में भारत का जंगल की आग प्रबंधन प्रस्ताव पारित
- प्रस्ताव में आग बुझाने के बजाय पहले से रोकथाम के उपायों पर जोर
नैरोबी में चल रहे संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा (यूएनईए-7) के सातवें सत्र में भारत का वैश्विक जंगल की आग प्रबंधन को मजबूत करने वाला प्रस्ताव शुक्रवार को भारी समर्थन के साथ पारित हो गया। पर्यावरण मंत्रालय ने बताया कि यह प्रस्ताव दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही जंगल की आग की संख्या, पैमाने और तीव्रता का जवाब है। इसमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने, जल्द चेतावनी प्रणाली बनाने और आग रोकथाम व प्रबंधन के लिए बेहतर वित्तीय मदद की मांग की गई है। मंत्रालय के अनुसार, जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियों के कारण पहले मौसमी रहने वाली जंगल की आग अब बार-बार और लंबे समय तक लग रही है।

हर साल लाखों हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित होता है, जिससे जंगल, जैव-विविधता, जल स्रोत, मिट्टी की सेहत, हवा की गुणवत्ता, लोगों की आजीविका और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचता है। जंगल की आग में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि भारत ने यूएनईपी की रिपोर्ट स्प्रेडिंग लाइक वाइल्डफायर में उल्लिखित चिंताजनक भविष्यवाणियों पर जोर दिया, जिसमें कहा गया है कि अगर आग को अनियंत्रित छोड़ दिया गया तो 2100 तक इसमें 50 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है। प्रस्ताव में आग बुझाने की बजाय पहले से रोकथाम पर जोर दिया गया है। इसके लिए बेहतर योजना, जल्द चेतावनी और जोखिम कम करने के उपाय जरूरी हैं।

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