
अंतरिक्ष, परमाणु क्षेत्र में बढ़ेगी निजी क्षेत्र की भागीदारी: जितेंद्र सिंह
- कहा, कोई दस साल पहले इसकी कल्पना भी नहीं कर सकता था
भारत का निजी क्षेत्र अब अंतरिक्ष और परमाणु जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में पहले से कहीं अधिक बड़ी भूमिका निभाने जा रहा है। यह ऐसा बदलाव, जो दस साल पहले अकल्पनीय था। ये बातें विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को कही। सीआईआई ग्लोबल समिट ऑन इंडस्ट्री-एकेडेमिया पार्टनरशिप में जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत 'फ्रैजाइल फाइव' की श्रेणी से निकलकर 'फर्स्ट अमंग फोर' के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलना एक बड़ा नीतिगत बदलाव है। कोई दस साल पहले इसकी कल्पना भी नहीं कर सकता था। आज भारतीय निजी कंपनियां अंतरिक्ष और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदार के रूप में उभर रही हैं।
सिंह ने कहा कि परमाणु क्षेत्र उसमें भी अब गैर-सरकारी संस्थाओं की भूमिका बढ़ने लगी है। यह क्षेत्र परंपरागत रूप से सरकारी नियंत्रण में रहा है। सरकारी सहयोग, गैर-सरकारी संस्थाओं के सहयोग के बिना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया में कहीं भी सरकार निजी उद्योग को उस स्तर पर वित्तीय सहायता नहीं देती, जैसा भारत में हो रहा है। मंत्री ने शोध संस्थानों, अकादमिक जगत और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को मजबूत करने की जरूरत बताई। साथ ही कहा कि ऐसा तालमेल नवाचार-प्रधान विकास के लिए आवश्यक है। देश में बढ़ते जेनेटिक डाटा बैंक पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह उद्योग और वैज्ञानिक शोध के लिए एक मूल्यवान संसाधन बन सकता है।

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