
‘खदानों को चालू करने में लगने वाला समय कम करना जरूरी’
केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि भारत में खनन को विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धा के लिए तेज करने की आवश्यकता है। उन्होंने खनन क्षेत्र में सुधारों की बात की और कहा कि खनिजों की खोज, क्लीयरेंस और भूमि अधिग्रहण में समय कम करना आवश्यक है। उन्होंने अर्बन माइनिंग और ई-कचरे से खनिज निकालने के नए अवसरों पर भी जोर दिया।
अहमदाबाद, एजेंसी। केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी का कहना है कि विश्वस्तरीय स्पर्धा के लिए देश में खदानों को चालू करने में लगने वाले समय को कम करने की जरूरत है। रेड्डी शुक्रवार को गांधीनगर के महात्मा मंदिर कन्वेंशन सेंटर में ‘राष्ट्रीय खनिज चिंतन शिविर 2026’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में पूरी खनन पारिस्थितिकी बदल रही है। आज, यह क्षेत्र न केवल विकास और औद्योगिक विकास का एक माध्यम है, बल्कि भारत की भू-राजनीतिक ताकत, रणनीतिक सुरक्षा और वैश्विक प्रभाव के लिए एक महत्वपूर्ण आधार भी बन गया है। उन्होंने कहा कि भारत में खनन क्षेत्र को व्यापक दृष्टिकोण से देखने, शोधन, रिसाइकिलिंग, रिप्रोसेसिंग जैसे पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है।
कहा कि नीलामी के बाद किसी खदान को शुरू करने में पांच से सात साल लग जाते हैं। हमें यह सुनिश्चित करना है कि अन्वेषण, क्लीयरेंस, भूमि अधिग्रहण आदि में लगने वाला समय कम से कम हो। बताया कि असम में एक खदान सिर्फ नौ माह में शुरू कर दी गई। ई-कचरे से खनिज तलाशें राज्य केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज कचरे के ढेर, ई-कचरे और फ्लाई ऐश से खनिज निकालने के नए मौके हैं। सभी राज्य सरकारों को अर्बन माइनिंग (शहरी खनन) पर आगे बढ़ना चाहिए। कहा कि इस साल, अर्बन माइनिंग और रीसाइकिलिंग इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए एक योजना शुरू हुई थी। सभी राज्य सरकारों को इसका लाभ लेना चाहिए। 11 साल में 190 प्रतिशत वृद्धि रेड्डी ने कहा कि पिछले 11 साल में खनन क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति और सुधार हुए हैं। सुधारों की गति जमीनी स्तर पर दिखने वाले नतीजों से मेल खाती है। कहा कि 2014 की तुलना में, भारत में खनन में लगभग 190 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और खनिज उत्पादन में दोहरे अंकों की विकास दर देखी गई है।

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