गिर के शेर भारत के प्राकृतिक विरासत के प्रतीक : भूपेंद्र यादव
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने गिर के शेरों को भारत की प्राकृतिक विरासत और साहस का प्रतीक बताया। उन्होंने बताया कि गिर लैंडस्केप में शेरों की आबादी 2025 तक 891 होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में 2026 में दिल्ली में पहले IBCAS शिखर सम्मेलन का आयोजन होगा, जिसमें 95 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने गुरुवार को कहा कि गिर के शेर भारत के गौरव, साहस और प्राकृतिक विरासत के प्रतीक हैं। भूपेंद्र यादव गुजरात के सासन गिर में आयोजित ‘लायन’ स्पीशीज स्पॉटलाइट कार्यक्रम का संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (आईबीसीए) शिखर सम्मेलन पहले आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों की श्रृंखला का एक हिस्सा है। देश की संरक्षण संबंधी सफलताओं का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि ग्रेटर गिर लैंडस्केप में शेरों की आबादी 2025 तक बढ़कर अनुमानित 891 हो गई है, जो 2020 की तुलना में 32 प्रतिशत ज्यादा है।
उन्होंने कहा कि प्रभावी संरक्षण और प्रबंधन प्रयासों से गिर लैंडस्केप के कई क्षेत्रों में शेरों की उप-आबादी को स्थिर करने और बढ़ाने में मदद मिली है। यादव ने कहा कि गिर के शेर न केवल गुजरात की पहचान हैं, बल्कि पूरे देश के गौरव, साहस और प्राकृतिक विरासत के प्रतीक भी हैं।भूपेंद्र यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में भारत एक-दो जून को दिल्ली में प्रथम आईबीसीए शिखर सम्मेलन 2026 की मेजबानी करेगा। उन्होंने कहा कि ‘शेरों को बचाओ, मानवता को बचाओ, पारिस्थितिकी तंत्र को बचाओ’ के नारे के साथ आयोजित इस शिखर सम्मेलन में एशिया, अफ्रीका और अमेरिका सहित 95 देशों के राष्ट्राध्यक्ष, शासनाध्यक्ष, नीति निर्माता, वैज्ञानिक, संरक्षण कार्यकर्ता, बहुपक्षीय एजेंसियां, वित्तीय संस्थान, सहयोगी संगठन और 400 प्रतिनिधि एक साथ जुटेंगे।
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