
सिलीगुडी-गुवाहाटी कॉरिडोर के लिए डीपीआर कंसल्टेंट नियुक्त होगा
संक्षेप: केंद्र सरकार ने सिलीगुड़ी-गुवाहाटी कॉरिडोर परियोजना के लिए डीपीआर कंसल्टेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की है। यह चार लेन का राष्ट्रीय राजमार्ग पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्से से जोड़ेगा।...
केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर सीमाओं तक हाई स्पीड रोड कनेक्टिविटी बनाने के लिए सिलीगुड़ी-गुवाहाटी कॉरिडोर परियोजना के लिए डीपीआर कंसल्टेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की है। सरकार की इस परियोजना के तहत चार लेन राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण किया जाएगा। इससे पूर्वोत्तर राज्य देश के बाकी हिस्से से हाई स्पीड कॉरिडोर से जुड़ जाएंगे। सामरिक दृष्टि से बेहद खास यह हाईवे सैन्य साजोसामान और सेना व उनके भारी वाहनों के लिए आसान साधन बनेगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग और अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचएआईडीसीएल) ने सिलीगुड़ी-गुवाहाटी कॉरिडोर (466 किमी) डीपीआर कंसल्टेंट नियुक्त करने का टेंडर (एनआईटी) जारी किया है।
कंसल्टेंट नवंबर माह से डीपीआर बनाने का कार्य शुरू कर देगा। इसके बाद परियोजना की लागत और एलाइनमेंट तय होगा। उन्होंने बताया कि सिलीगुड़ी से गुवाहाटी तक एक 4-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड हाईस्पीड कॉरिडोर के निर्माण किया जाएगा। जो बाद में जोहार घाटी तक कनेक्ट किया जाएगा। अधिकारी ने बताया कि इस परियोजना के सामरिक और आर्थिक फायदे हैं। यह कॉरिडोर पश्चिम बंगाल और असम के प्रमुख शहरों को सीधे जोड़ेगा, जिससे पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंच आसान हो जाएगी। रोड कनेक्टिविटी पूर्वोत्तर क्षेत्र के आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी, इससे व्यापार, वाणिज्य और पर्यटन में वृद्धि होगी। सिलीगुड़ी गलियारा, जिसे चिकन नेक भी कहा जाता है, भारत के लिए एक अत्यधिक संवेदनशील और सामरिक महत्व वाला क्षेत्र है। बॉक्स चीन की सीमा से सटे होने के कारण किसी भी आपात स्थिति या सीमा विवाद के दौरान सेना को कम समय में सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंचाने में यह कॉरिडोर महत्वपूर्ण लाइफलाइन का काम करेगी। इस कॉरिडोर से पूर्वोत्तर राज्यों में सेना और साजो-सामान की आवाजाही तेज हो जाएगी।

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