ब्यूरो:::संसद सत्र:::भारत में विकास दर ज्यादा मुद्रास्फीति कम: निर्मला सीतारमण
वित्त मंत्री ने राज्यसभा में बजट पर चर्चा का जवाब दिया नई दिल्ली, विशेष

वित्त मंत्री ने राज्यसभा में बजट पर चर्चा का जवाब दिया नई दिल्ली, विशेष संवाददाता केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को राज्यसभा में कहा कि वैश्विक स्थिति के विपरीत भारत में जीडीपी विकास दर अधिक और मुद्रास्फीति कम है, जो एक दुर्लभ स्थिति है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति कोई तुक्का नहीं है बल्कि यह समय पर लिए गए विस्तृत निर्णय एवं कदमों तथा सतत विकास का परिणाम है। बजट पर चर्चा का जवाब देते हुए सीतारमण ने विपक्ष के सवालों का जवाब दिया साथ ही यूपीए सरकार से तुलना करते हुए अर्थव्यवस्था के उजले पक्ष को सदन के सामने रखा।
विकसित भारत हमारा लक्ष्य निर्मला सीतारमण ने कहा कि हमारा लक्ष्य विकसित भारत है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अग्रिम अनुमानों के अनुसार 2025-26 की वास्तविक जीडीपी विकास दर 7.4 प्रतिशत बताई गई है तथा सामान्य विकास दर करीब आठ प्रतिशत होगी। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक घटकर करीब दो प्रतिशत रह गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि वह जिस स्थिति की बात कर रही है उसमें ऊंची विकास दर, दामों में स्थिरता है जो वैश्विक स्तर पर कम देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था की आधारभूत स्थिति को परिलक्षित करती है। सीतारमण ने कहा कि वह इस बात को दोहराना चाहती हैं कि यह उपलब्धि भारत के लोगों की उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि 2026-27 का बजट इस तरीके से डिजाइन किया गया है कि इन उपलब्धियों का लाभ उठाया जा सके। इस विकास गति को अगले दशकों तक विस्तार दिया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि इन सबमें आत्मनिर्भरता एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है तथा सरकार ने बजट में जो भी घोषणाएं कीं और नीतियां बनाई हैं, उसमें आत्मनिर्भरता का ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि हमने घरेलू उत्पादन क्षमता का निर्माण किया है और बजट का निर्माण करते समय हमने ऊर्जा सुरक्षा को भी अपने ध्यान में रखा है। पंद्रह पैसे पहुंचने का जमाना गया वित्त मंत्री ने कहा कि वो जमाना चला गया जब दिल्ली से एक रुपया चलता था तो लोगों के पास पंद्रह पैसा पहुंचता था, अब एक-एक पैसा लोगों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कि 2014 के बाद से लाभार्थियों के पास प्रत्यक्ष नकदी अंतरण के माध्यम से 48 लाख करोड़ रुपये पहुंचाया जा चुका है तथा इसके माध्यम से 4.31 लाख करोड़ रूपये गलत हाथों में जाने से बचाया गया है। वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि उच्च आयकर संग्रह का यह अर्थ नहीं है कि देश में मध्यम वर्ग का दमन हो रहा है। सरकारी योजनाओं पर हुए खर्च की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में सामाजिक क्षेत्र की 14 योजनाओं में केवल 37,000 करोड़ रुपये ही बिना खर्च किए रह गए, जबकि संप्रग सरकार के दौरान यह आंकड़ा 94,000 करोड़ रुपये था। सीतारमण ने आवंटन के बिना योजनाओं की घोषणा करने के विपक्ष के आरोपों को भी खारिज करते हुए पिछली संप्रग सरकार के दौरान के कई उदाहरण दिए। तमिलनाडु के मुद्दे पर नोंकझोंक तमिलनाडु के मसले पर वित्त मंत्री के विवरण पर सवाल उठाते हुए नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि क्या यह तमिलनाडु का बजट है? इसी मुद्दे पर वित्त मंत्री की विपक्षी सदस्यों से नोंकझोंक भी हुई। वित्त मंत्री ने पश्चिम बंगाल सरकार पर केंद्र की योजनाएं लागू नहीं करने का आरोप भी लगाया। सीतारमण ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर बताने वाले दरअसल देश के उन सभी लोगों का मजाक बना रहे हैं जिनके कारण यह उपलब्धि हासिल हो पाई है।
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।



