भारतीय ओएमसी रिफाइनरियों को रियायती दरों पर भुगतान करेंगी
ईंधन की कीमतों के नियंत्रणमुक्त होने के बाद, भारत की सरकारी पेट्रोलियम विपणन कंपनियां रिफाइनरियों को पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन के लिए रियायती कीमत का भुगतान करेंगी। यह कदम खुदरा कीमतों को स्थिर रखने के लिए उठाया गया है। रियायती दरें 16 मार्च से प्रभावी होंगी।

नई दिल्ली। ईंधन की कीमतों के नियंत्रणमुक्त होने के बाद पहली बार, भारत की सरकारी पेट्रोलियम विपणन कंपनियां (ओएमसी) पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन (एटीएफ) और केरोसिन यानी मिट्टी के तेल के लिए रिफाइनरियों को रियायती कीमत का भुगतान करेंगी। यह कदम खुदरा ईंधन कीमतों को स्थिर रखने के कारण होने वाले घाटे को सीमित करने के लिए उठाया गया है। पेट्रोलियम विपणन कंपनियों ने 26 मार्च को पेट्रोलियम उत्पादों के लिए ऐसी दरें तय की हैं, जो उनकी आयात लागत से 60 रुपये प्रति लीटर तक कम हैं। ये रियायती दरें 16 मार्च से प्रभावी मानी जाएंगी और इसका सबसे बुरा असर एमआरपीएल (एमआरपीएल), सीपीसीएल (सीपीसीएल) और एचएमईएल (एचएमईएल) जैसी स्वतंत्र रिफाइनरियों पर पड़ेगा।
कोल इंडिया 2.56 करोड़ टन कोयला बेचेगीनई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) इस महीने ऑनलाइन नीलामी के जरिये 2.56 करोड़ टन कोयले की पेशकश करने की योजना बना रही है। कोल इंडिया के इस कदम से पश्चिम एशिया संकट के बीच उद्योग को ऊर्जा आपूर्ति के झटकों को कम करने में मदद मिलेगी। पश्चिम से एलएनजी, एलपीजी और कच्चे तेल की आपूर्ति में आए व्यवधान की वजह से कोयले की मांग बढ़ गई है। साथ ही आयातित कोयला भी महंगा हो गया है। कोल इंडिया ने इस साल फरवरी में 2.05 करोड़ टन के मुकाबले मार्च में ई-नीलामी के जरिये 3.25 करोड़ टन कोयले की पेशकश की थी। देश की प्रमुख कोयला उत्पादक कंपनी एकल खिड़की के माध्यम से एग्नोस्टिक (एसडब्ल्यूएमए) नीलामी से कोयले की पेशकश करती है। एसडब्ल्यूएमए नीलामी एक एकीकृत और सरलीकृत नीलामी प्रक्रिया है, जो 2022 में शुरू की गई थी।‘नवरत्न’ के दर्ज पर हिंदुस्तान कॉपर की ‘ नजरनई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड 'नवरत्न' का दर्जा पाने का प्रयास कर रही है। कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक संजीव कुमार सिंह का मानना है कि यह उपलब्धि कंपनी के बेहतर परिचालन, संगठन की उत्कृष्टता और रणनीतिक वृद्धि की वजह से हासिल होगी। सिंह ने कहा कि हिंदुस्तान कॉपर ने 2025-26 के दौरान कई मोर्चों पर प्रगति की है। इनमें खनन परिचालन को मजबूत करना, विस्तार और नई परियोजनाएं, प्रणाली और प्रक्रियाओं में सुधार शामिल है। उन्होंने कहा कि कंपनी डिजिटलीकरण, परिचालन दक्षता और अनुपालन की दिशा में भी कई कदम उठा रही है। हिंदुस्तान कॉपर इस समय अपने खनन परिचालन के तेजी से विस्तार की योजना बना रही है।चौथी तिमाही में एफएमसीजी कंपनियों की स्थिर वृद्धिनई दिल्ली। रोजमर्रा के उपभोग के सामान बनाने वाली एफएमसीजी कंपनियों की वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही में स्थिर मांग के बीच वृद्धि मजबूत रही। हालांकि, पश्चिम एशिया के बाजारों में जारी भू-राजनीतिक तनाव चिंता का विषय बना हुआ है। मैरिको, डाबर और एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस (पूर्व में अदाणी विल्मर) जैसी कंपनियों ने मात्रा और मूल्य दोनों में वृद्धि दर्ज की है। यह बढ़ोतरी मूल्य निर्धारण में बदलाव, विभिन्न उत्पाद श्रेणियों में गति, मजबूत घरेलू खपत और संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों को छोड़कर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में वृद्धि के कारण संभव हुई है। कंपनियों को उम्मीद है कि महंगाई में कमी आने से मार्जिन में सुधार होगा। हालांकि वे आने वाली तिमाहियों को लेकर सतर्कता के साथ आशावादी बनी हुई हैं।फोटो खबरमार्च में 38 कंपनियों ने आईपीओ दस्तावेज दाखिल किएनई दिल्ली, एजेंसी। कंपनियों के बीच आईपीओ को लेकर आकर्षण बरकरार है। एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट और मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज सहित 38 कंपनियों ने मार्च 2026 में सेबी के पास आईपीओ के लिए शुरुआती दस्तावेज दाखिल किए हैं। इनमें जेटवर्क, एसएनवीए ट्रैवलटेक, रेडिफ.कॉम इंडिया, टोरेंट गैस, सिनर्जी एडवांस्ड मेटल्स, गरुड़ एयरोस्पेस और सोहन लाल कमोडिटी मैनेजमेंट समेत कुल नौ कंपनियों ने गोपनीय तरीके से आईपीओ दस्तावेज दाखिल किए हैं। सेबी के आंकड़ों से पता चलता है कि मार्च, 2025 में 22 और मार्च, 2024 में 16 कंपनियों ने आईपीओ के लिए शुरुआती दस्तावेज दाखिल किए थे। यह दर्शाता है कि सार्वजनिक निर्गम को लेकर आकर्षण कायम है।जनवरी-मार्च में शीर्ष सात शहरों में घरों की कीमतों में मामूली वृद्धि: एनारॉकनई दिल्ली। देश के शीर्ष सात आवास बाजारों में जनवरी-मार्च अवधि के दौरान औसत कीमतों में पिछली तिमाही की तुलना में केवल दो प्रतिशत की मामूली वृद्धि देखी गई। संपत्ति के बारे में परामर्श देने वाली कंपनी एनारॉक की रिपोर्ट में यह बात कही गई। एनारॉक के आंकड़ों के अनुसार, सात प्रमुख शहरों में घरों की औसत कीमतें जनवरी-मार्च में बढ़कर 9,456 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गईं, जो पिछली तिमाही में 9,260 रुपये प्रति वर्ग फुट थीं। सालाना आधार पर, कीमतों में सात प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो जनवरी-मार्च, 2025 में 8,868 रुपये प्रति वर्ग फुट थी। एनारॉक सात प्रमुख शहरों के प्राथमिक (पहली बिक्री) आवास बाजारों पर निगरानी रखता है। इन शहरों में मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर), दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता शामिल हैं।उत्पादन लागत बढ़ने से टीवी उद्योग की बिक्री पर असरनई दिल्ली। टेलीविजन उद्योग पर बढ़ती लागत का दबाव गहराता जा रहा है, जिससे आने वाले समय में बिक्री पर असर पड़ने की आशंका है। रैम की कीमतों में तेजी के साथ-साथ पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण प्लास्टिक और समुद्री ढुलाई की लागत भी बढ़ गई है। बढ़ती कीमतों का असर उपभोक्ताओं की पसंद पर भी दिखाई देने लगा है। कई ग्राहक अब बड़े परदे वाले टेलीविजन की बजाय छोटे आकार के मॉडल चुन रहे हैं। बड़ी कंपनियों ने अभी तक पूरी लागत वृद्धि ग्राहकों पर नहीं डाली है और बाजार में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए कुछ बोझ स्वयं वहन कर रही हैं। इसके बावजूद उपभोक्ता अपनी खरीद टाल रहे हैं। हालांकि उद्योग को उम्मीद है कि वर्ष के दूसरे हिस्से में त्योहारों के दौरान मांग में सुधार होगा।आईआईएफसीएल दोगुना निवेश करेगीनई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी इंडिया इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी लिमिटेड (आईआईएफसीएल) अपनी निवेश विविधीकरण रणनीति के तहत चालू वित्त वर्ष में अवसंरचना निवेश ट्रस्ट (इनविट) में अपना निवेश दोगुना कर 6,000 करोड़ रुपये करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। आईआईएफसीएल का 31 मार्च, 2026 तक नौ इनविट में कुल निवेश 3,000 करोड़ रुपये था। आईआईएफसीएल के प्रबंध निदेशक रोहित ऋषि ने बताया, ''हमें उम्मीद है कि हम चालू वित्त वर्ष में इनविट में अपना निवेश दोगुना कर लेंगे। मार्च, 2027 के आखिर तक यह 6,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाना चाहिए।''
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