माल ढुलाई से होने वाले उत्सर्जन से निपटने की रणनीति बनाने पर जोर
नई दिल्ली में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का माल ढुलाई क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसका कार्बन फुटप्रिंट भी बढ़ रहा है। रिपोर्ट में प्रदूषण को मापने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित फ्रेमवर्क विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है, ताकि भविष्य की क्लीन फ्रेट प्रोग्राम्स और डीकार्बनाइजेशन रणनीतियों में भारत की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। जलवायु खतरों से निपटने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में उत्सर्जन कम करने के प्रयास जारी हैं। लेकिन परिवहन क्षेत्र में उत्सर्जन कम करना अब भी चुनौती बना हुआ है। एक नई रिपोर्ट में इससे निपटने के लिए रणनीति बनाने पर जोर दिया गया है। आईआईएम बेंगलुरु, टेरी तथा स्मार्ट फ्रेट सेंटर इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत का फ्रेट (माल ढुलाई) सेक्टर जितनी तेजी से बढ़ रहा है, उतनी ही रफ्तार से इसका कार्बन फुटप्रिंट भी फैल रहा है, लेकिन इसे मापने का कोई फार्मूला अभी नहीं है। ऐसे में अब तक नीतियां केवल अनुमानों पर बनी हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जब तक ढुलाई से होने वाले प्रदूषण को मापा नहीं जाएगा, तब तक उसे वैज्ञानिक रूप से समझा भी नहीं जा सकेगा। इसी सिद्धांत के आधार पर यह दस्तावेज एक राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित फ्रेमवर्क की वकालत करता है। टेरी के विशेषज्ञों का भी कहना है कि माल ढुलाई उत्सर्जन का हिसाब रखना भविष्य के क्लीन फ्रेट प्रोग्राम्स, डीकार्बनाइजेशन रणनीतियों और उभरते हुए वैश्विक कार्बन मार्केट्स में भारत की मजबूत भागीदारी की नींव रखने जैसा है। इसलिए सबसे पहले इसे मापने का फार्मूला विकसित करना होगा। हवा में घुल रहे जहरीले तत्व रिपोर्ट बताती है कि माल ढुलाई से होने वाला नुकसान केवल कार्बन डाइऑक्साइड तक सीमित नहीं है। इससे निकलने वाले नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर ऑक्साइड, पार्टिकुलेट मैटर और ब्लैक कार्बन जैसे प्रदूषक तत्व हमारे शहरों की हवा को जहरीला बना रहे हैं। खासतौर से औद्योगिक गलियारों के आसपास रहने वाली आबादी पर इसका सीधा और घातक प्रभाव पड़ रहा है। दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मालवाहक है भारतीय रेलवे तेज शहरीकरण, उपभोक्ता मांग, खनन और औद्योगिक विकास की तीव्र गति सभी के लिए माल ढुलाई (परिवहन) की आवश्यकता सर्वोपरि है। व्यस्त बंदरगाहों से लेकर दूरस्थ ग्रामीण राजमार्गों तक, माल ढुलाई नेटवर्क देश की आपूर्ति शृंखलाओं की महत्वपूर्ण रीढ़ हैं। भारत में परिवहन उत्सर्जन में माल ढुलाई (ट्रक, रेल, बंदरगाह) का बहुत बड़ा हिस्सा है। इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि वर्ष 2024-25 में, भारतीय रेलवे 1.6 अरब टन से अधिक माल परिवहन करके अमेरिका और रूस को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेल मालवाहक बन गया। देश में आर्थिक विकास, शहरीकरण और ई-कॉमर्स में वृद्धि के साथ, 2050 तक माल ढुलाई की मांग तीन गुना होने का अनुमान है।

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