बुलेट ट्रेन की पहली झलक सामने आई
रेलवे मंत्रालय के गेट नंबर 4 पर लगी तस्वीर नई दिल्ली,एजेंसी। भारत की पहले

रेलवे मंत्रालय के गेट नंबर 4 पर लगी तस्वीर नई दिल्ली,एजेंसी। भारत की पहले बुलेट ट्रेन की पहली झलक सोमवार को सामने आई। दिल्ली में रेल मंत्रालय के गेट नंबर 4 पर मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल की फोटो लगाई गई है।
बुलेट ट्रेन का प्रोजेक्ट
रेल मंत्रालय ने भरोसा जताया है कि इसी साल गुजरात के सूरत और बिलिमोरा के बीच (करीब 50 किमी) देश की पहली बुलेट ट्रेन चलाई जा सकती है। बुलेट ट्रेन का प्रोजेक्ट (508 किमी) जापान सरकार की तकनीकी और वित्तीय सहायता से पूरा किया जा रहा है।
ट्रेन का डिजाइन
मंत्रालय में दिखाई गई तस्वीर में जो डिजाइन है, वह जापान से पूरी तरह से आयात की गई शिंकनसेन ट्रेन नहीं है। 2024 के आखिर में रेलवे की अपनी 'इंटीग्रल कोच फैक्टरी' ने बेंगलुरु स्थित बीईएमएल को स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेनों के डिजाइन, निर्माण और उन्हें चालू करने के लिए 867 करोड़ रुपये का ठेका दिया था।
औसत स्पीड
इन ट्रेनों को औसतन 250 किलोमीटर प्रति घंटे और अधिकतम 280 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने के लिए डिजाइन किया जा रहा है। अनुमान है कि इसके हर कोच की लागत लगभग 28 करोड़ रुपये होगी। यह ट्रैक खुद 320 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार के लिए बनाया जा रहा है, जिससे भविष्य में और भी तेज ट्रेनों के लिए गुंजाइश बनी रहेगी।
सर्विस की योजना
दो तरह की सर्विस की योजना है। एक, एक रैपिड एक्सप्रेस जो सिर्फ सूरत और वडोदरा में रुकेगी। अभी प्लान की जा रही ट्रेनों से मुंबई-अहमदाबाद का सफर दो घंटे से कुछ ज्यादा समय में पूरा किया जा सकेगा और दूसरी, एक धीमी, सभी स्टेशनों पर रुकने वाली सर्विस जिसे तीन घंटे से कुछ कम समय लगेगा।
राज्यों का विवरण
इन राज्यों से होकर गुजरेगा बुलेट ट्रेन
गुजरात, महाराष्ट्र और दादर और नागर हवेली
स्टेशनों की संख्या
12 स्टेशन होंगे
मुंबई, ठाणे, विरार, बोईसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती
निर्माण की प्रगति
आठ स्टेशनों पर नींव का काम पूरा
वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, आनंद, वडोदरा, अहमदाबाद और साबरमती। 17 नदी पुलों का काम पूरा हो चुका है। गुजरात में 4 बड़े नदी पुलों (नर्मदा, माही, ताप्ती और साबरमती) का काम काफी आगे बढ़ चुका है और महाराष्ट्र में 4 नदी पुलों का काम चल रहा है। डिपो (ठाणे, सूरत और साबरमती) पर काम पूरी रफ्तार से चल रहा है।
खुदाई की स्थिति
बांद्रा में खुदाई का काम 91 फीसदी पूरा
बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में खुदाई का काम लगभग 91% पूरा हो चुका है, और कंक्रीट का काम अलग-अलग चरणों में है। इसमें लेवल-4 पर बेसमेंट स्लैब का काम 100% पूरा हो चुका है। समुद्र के नीचे सुरंग (लगभग 21 किमी) का काम शुरू हो चुका है, जिसमें से महाराष्ट्र में घनसोली और शिलफाटा के बीच 4.8 किमी सुरंग का काम पूरा हो चुका है।
प्रोजेक्ट का कितना काम पूरा?
- 508 किलोमीटर लंबे रूट पर 349 किलोमीटर का वायाडक्ट(एक ऊंचा, पुल जैसा ढांचा जो कॉरिडोर के 90% हिस्से को सड़कों, नदियों और मौजूदा रेल लाइनों के ऊपर से ले जाता है) पूरा हो चुका है।
-443 किलोमीटर तक खंभे भी लगाए जा चुके हैं, जो वायाडक्ट को सहारा देते हैं।
-मेनलाइन के 179 किलोमीटर हिस्से में 7700 से अधिक ओएचई(ओवरहेड इक्विपमेंट) मास्ट लगाए जा चुके हैं।
- 288 किलोमीटर के हिस्से में 5.7 लाख से अधिक नॉइज बैरियर (शोर रोकने वाले अवरोधक) लगाए जा चुके हैं।
-374 किलोमीटर तक ट्रैक बेड बेस निर्माण पूरा हो चुका है। ट्रैक बिछाने का काम धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है।
निर्माण की गति
काम की रफ्तार तेज हुई
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मई की शुरुआत में कहा था कि भारत अब बुलेट-ट्रेन कॉरिडोर पर हर महीने 15 किलोमीटर हाई-स्पीड रेल ट्रैक बिछा रहा है। उन्होंने बताया कि निर्माण की रफ्तार को शुरू में अनुमानित 2 किलोमीटर प्रति माह से बढ़ाकर काफी तेज कर दिया गया है।
प्रोजेक्ट की लागत
1.98 करोड़ रुपये लागत
इस प्रोजेक्ट को शुरू में लगभग 1.08 लाख करोड़ रुपये की मंजूरी मिली थी। अब इसकी लागत लगभग 1.98 लाख करोड़ होने का अनुमान है, जिसकी वजह जमीन अधिग्रहण में देरी और प्रोजेक्ट के दायरे में बदलाव हैं।
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