
नक्सलियों के पास नेतृत्व का संकट
भारत में नक्सल हिंसा के खिलाफ लड़ाई अपने अंतिम चरण में पहुँच गई है। हिंसा की घटनाएँ लगभग समाप्त हो चुकी हैं और सुरक्षा बलों ने 2014 से 2025 तक 1841 नक्सलियों को मारा और 16336 को गिरफ्तार किया। गृह मंत्रालय का मानना है कि मार्च 2026 से पहले नक्सलवाद समाप्त हो जाएगा, लेकिन विकास की चुनौती अभी बाकी है।
देश में नक्सल हिंसा के खिलाफ लड़ाई अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। हिंसा की घटनाएं लगभग शून्य स्तर पर पहुंच गई हैं। गिनती के नक्सली और उनका दिखावटी नेतृत्व बचा है। लड़ाकू कैडर खत्म किया जा चुका है । गृह मंत्रालय आश्वस्त है कि मार्च 2026 के पहले नक्सलवाद खत्म हो जाएगा, लेकिन इसके बाद असल चुनौती विकास प्रक्रिया को सभी नक्सल प्रभावित इलाकों में समान रूप से पहुंचाना है। इसकी विस्तृत कार्ययोजना पर काम चल रहा है। विशेष फंड के जरिये राहत पुनर्वास और विकास का काम नक्सल इलाकों में किया जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, 2014 से दिसंबर 2025 के बीच, सुरक्षा बलों ने नक्सल प्रभावित राज्यों में 1841 नक्सलियों को मार गिराया।
16336 को गिरफ्तार किया और 9588 के आत्मसमर्पण में सहायता की। अधिकारियों ने कहा कि ये आंकड़े पिछले एक दशक में नक्सली नेटवर्क के लगातार कमजोर होने का पुख्ता प्रमाण हैं। बताया कि 2025 में 2167 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जो किसी एक वर्ष के लिए सबसे अधिक है। इसी वर्ष 335 नक्सलियों को मार गिराया गया। यह भी एक वर्ष का सबसे बड़ा आंकड़ा है। 2014 और दिसंबर 2025 के बीच सुरक्षाबलों ने देश भर में नक्सलियों के खिलाफ कुल 27765 कार्रवाइयां कीं। इनमें 1841 नक्सली मारे गए, 16336 गिरफ्तार किए गए और 9588 ने आत्मसमर्पण किया। अधिकारियों ने बताया कि हर तीन दिन में एक नक्सली मारा गया और लगभग चार गिरफ्तारियां और दो आत्मसमर्पण प्रतिदिन हुए।

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