लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


- दस में से एक व्यक्ति के पास नहीं है नियमित आय का साधन नई दिल्ली,एजेंसी। भारत में सेवानिवृत्ति के बाद केवल 23.1 प्रतिशत बुजुर्ग ही काम कर रहे हैं। यह बात अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर एजवेल फाउंडेशन द्वारा किए गए एक अध्ययन में सामने आयी है। अध्ययन के मुताबिक, अधिकतर लोगों का जीवन नाजुक वित्तीय व्यवस्था पर निर्भर है। 35.6 प्रतिशत लोग सरकारी पेंशन पर, 19 प्रतिशत वृद्धावस्था पेंशन पर, 16.6 प्रतिशत बचत पर और 14.2 प्रतिशत परिवार के भरण-पोषण पर निर्भर हैं। लगभग दस में से एक व्यक्ति के पास कोई नियमित आय नहीं है। वरिष्ठ नागरिकों में से 73 प्रतिशत से अधिक ने सेवानिवृत्ति के बाद के करियर में रुचि दिखाई है।
LiveHindustan को अपना पसंदीदा Google न्यूज़ सोर्स बनाएं – यहां क्लिक करें।यह रुचि सिर्फ पैसे के लिए ही नहीं बल्कि उनके सम्मान, स्वतंत्रता और उन्हें सक्रिय बनाए रखने के लिए है। 55 वर्ष और उससे अधिक आयु के 10,000 उत्तरदाताओं के साथ किए गए अध्ययन में पाया गया कि केवल 23.1 प्रतिशत वृद्ध ही वर्तमान में सेवानिवृत्ति के बाद काम कर रहे हैं। सहयोग से सशक्त हो सकते हैं बुजुर्ग एजवेल फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष हिमांशु रथ ने कहा कि भारत के बुजुर्ग न केवल वित्तीय स्थिरता, बल्कि गरिमा, सम्मान और उद्देश्य की भी आकांक्षा रखते हैं। नीति, कॉर्पोरेट नवाचार और पारिवारिक सहयोग के जरिए इस क्षमता को विकसित करने से सेवानिवृत्ति को निर्भरता से सशक्तिकरण में बदला जा सकता है। लंबी उम्र के बाद भी काम को जरूरी मानते हैं सर्वेक्षण से पता चला है कि वरिष्ठ नागरिक व्यवस्थित रोजगार के अवसरों (69.8 प्रतिशत) को पसंद करते हैं। इसके अनुसार स्वयंसेवा (30.7 प्रतिशत) और कृषि (22.7 प्रतिशत) भी आकर्षक विकल्प बने हुए हैं। इसके अनुसार लगभग 41.8 प्रतिशत लोग लंबी उम्र के लिए सेवानिवृत्ति के बाद काम को जरूरी मानते हैं। लेकिन फिर भी बाधाएं बनी हुई हैं।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।