
डीपीआई और एआई के जरिए पैदा होंगे बड़े अवसर
भारत तेजी से तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में बढ़ रहा है। एआई और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) पर एक सम्मेलन में विशेषज्ञों ने आर्थिक विकास के लिए एआई की आवश्यकता पर जोर दिया। सचिव एस कृष्णन ने कहा कि डीपीआई तकनीक को सुलभ और किफायती बनाता है, जिससे हर नागरिक को लाभ मिलता है।
नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। भारत दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा। नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्मार्ट गवर्नमेंट (एनआईएसजी) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा विकसित भारत के लिए एआई और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) विषय पर आयोजित सम्मेलन नीति-निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों, उद्योग नेताओं और डिजिटल गवर्नेंस से जुड़े व्यक्तियों ने आर्थिक विकास के लिए एआई की आवश्यकता पर जोर दिया। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने कहा कि भारत की डिजिटल यात्रा तभी सफल होती है जब सरकार, निजी क्षेत्र, नागरिक समाज और शिक्षा जगत मिलकर काम करें। डीपीआई का लक्ष्य तकनीक को सुलभ और किफायती बनाना है, जिससे कि इसका लाभ हर नागरिक को मिले।

वहीं, वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम नगराजू ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर व जन धन जैसे अभियानों ने वित्तीय समावेशन को काफी बढ़ा दिया है। डीपीआई के जरिए आज किसी भी योजना के लाभार्थी तक बिना किसी हस्तक्षेप के सीधे पहुंच पाना संभव हुआ है। अब एआई की दुनिया में डीपीआई से जुड़े कार्यों को गति मिलेगी। इस मौके पर यूआईडीएआई और एनआईएसजी के सीईओ ने कहा कि एनआईएसजी की कार्यप्रणाली सरकारी निर्णय-प्रक्रिया और निजी क्षेत्र की दक्षता को बढ़ाना है, जिससे डीपीआई को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद मिली है। भविष्य में भी डीपीआई को किस तरह से आगे बढ़ाया जाना है, उस पर सभी हितधाकों के साथ विचार विमर्श किया जा रहा। डीपीआई ने बीते दशक में भारत को डिजिटल परिवर्तन की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। डीपीआई और एआई का संगम आने वाले वर्षों वर्षों में अधिक बड़ी संभावनाएं खोलेगा।

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