
ब्यूरो ::: सात हाई-स्पीड कॉरिडोर से भारतीय रेल में रफ्तार का नया युग शुरू
नई दिल्ली, अरिवंद सिंह। वित्त मंत्री निर्मला सीतारण ने रविवार को संसद में
नई दिल्ली, अरिवंद सिंह। वित्त मंत्री निर्मला सीतारण ने रविवार को संसद में पेश आम बजट 2026-27 में वंदे भारत एक्सप्रेस, वंदे भारत एक्सप्रेस-स्लीपर, अमृत भारत आदि सेमी हाई स्पीड ट्रेन को फुल स्पीड पर दौड़ने के लिए सात नए हाई स्पीड कॉरिडोर की घोषणा की। इसके साथ ही भारतीय रेल में नए रफ्तार युग की शुरुआत हो गई है, क्योंकि उक्त कॉरिडोर पर सेमी हाई स्पीड ट्रेन समय पर चलेंगी। वहीं, इससे मेल-एक्सप्रेस ट्रेन की औसत गति 60-70 फीसदी तक बढ़ जाएगी। बजट में पिछले साल के अपेक्षाकृत 10.14 फीसदी की बजटीय सहायता को बढ़ाते हुए इसका आकार 2,81,377.32 करोड़ रुपये कर दिया है।
इससे इंजन-कोच-वैगन (रोलिंग स्टॉक) का उत्पादन, ट्रैक नवीनीकरण, नई लाइनें, आमान परिवर्तन, लाइनों का दोहरीकरण तेजी से किया जा सकेगा। आम बजट 2026-27 में बुनियादी ढांचे को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हुए निर्मला सीतारमण ने रेल नेटवर्क के कायाकल्प के लिए सात नए हाई-स्पीड रेल (एचएसआर) कॉरिडोर का प्रावधान किया है। यह कदम न केवल शहरों के बीच की दूरी को कम करेगा, बल्कि भारतीय रेल की औसत गति में भी क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। भारत को जोड़ने वाला मार्ग बनेगा रिफॉर्म एक्सप्रेस को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने देश के उत्तरी, पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों को जोड़ने के लिए नए कॉरिडोर बनाने की तैयारी की है। इसमें मुंबई-पुणे (कॉरिडोर)महाराष्ट्र के दो बड़े आर्थिक केंद्रों को जोड़ेगा। दिल्ली-वाराणसी उत्तर भारत का प्रमुख कनेक्टिविटी लिंक है, फिर वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई स्पीड कॉरिडोर पूर्वोत्तर भारत को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग बनेगा। पुणे-हैदराबाद आईटी और औद्योगिक हब के बीच तेज रफ्तार मुहैया कराएगा। इसके अलावा हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु हाई स्पीड रेल कॉरिडोर दक्षिण भारत में तेज रेल कनेक्टिविटी मुहैया कराएंगे। नए हाई स्पीड कॉरिडोर बनने से दूसरे रेलमार्गों पर मेल-एक्सप्रेस ट्रेन की औसत गति 55 किमी प्रतिघंटा से बढ़कर 60-70 प्रतिघंटा हो जाएगी। वहीं सेमी हाई स्पीड ट्रेन 90-95 किमी प्रतिघंटा से फर्राटा भरेगी। भविष्य में इन ट्रेन को अधिकतम रफ्तार 160-180 किमी प्रतिघंटा दौड़ने की है। रोलिंग स्टॉक मद में सबसे अधिक राशि रेलवे आम बजट में 281377.32 करोड़ रुपये की बजटीय सहायता से रोलिंग स्टॉक (इंजन-कोच-वैगन) उत्पादन सहित बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा। रेलवे ने नई लाइन बिछाने के लिए 36721.55 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। लाइनों के दोहरीकरण के लिए 37750 करोड़, आमान परिवर्तन के लिए 4600 करोड़, लाइनों के नवीनीकरण 22853 करोड़ और रेल संरक्षा कोष के लिए 12000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। सिग्नल सिस्टम को अपग्रेड करने 7500 करोड़ व कोच फैक्ट्रियों को 3888.29 करोड़ रुपये दिए गए हैं। सबसे अधिक रोलिंग स्टॉक मद में 52108.73 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

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