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चिंताजनक : भारत का औसत तापमान 0.89 डिग्री बढ़ा

चिंताजनक : भारत का औसत तापमान 0.89 डिग्री बढ़ा

संक्षेप:

भारत में 2015 से 2024 के बीच औसत तापमान 0.89 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है। जलवायु परिवर्तन पर एक अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि यदि उत्सर्जन मध्यम स्तर पर भी रहा तो 2050 तक तापमान 1.2-1.3 डिग्री सेल्सियस बढ़ सकता है। समुद्री हीटवेव, सूखा, और अत्यधिक बारिश की घटनाएं बढ़ने की आशंका है।

Tue, 25 Nov 2025 07:44 PMNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नई दिल्ली, एजेंसी। भारत में 2015 से 2024 के बीच औसत तापमान 0.89 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया है, जबकि मौसम की चरम घटनाएं कई हिस्सों में अब अधिक सामान्य होती जा रही हैं। देश के मौसम और जलवायु बदलाव पर किए गए एक अध्ययन में ये चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं। पीएलओएस क्लाइमेट जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार, यदि उत्सर्जन मध्यम स्तर पर भी बना रहा तो 2050 तक भारत में तापमान में 1.2 से 1.3 डिग्री सेल्सियस की अतिरिक्त बढ़ोतरी हो सकती है। इसके लिए 1995–2014 की अवधि को आधार माना गया है। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी कि आने वाले वर्षों में संयुक्त जलवायु खतरे जैसे हीटवेव के दौरान सूखा भारत के लिए बेहद चिंताजनक होंगे।

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भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) पुणे और आंध्र प्रदेश के क्रीया विश्वविद्यालय के संयुक्त शोध में यह निष्कर्ष सामने आए हैं। वैज्ञानिकों ने इसके लिए मौसम विभाग के आंकड़ों और वैश्विक जलवायु मॉडलों का विश्लेषण किया। एक साथ कई आपदाएं झेलनी पड़ेंगी शोधकर्ताओं ने कहा, भविष्य में संयुक्त जलवायु घटनाएं जैसे बाढ़ और तूफान, हीटवेव और सूखा, भारी वर्षा और बाढ़ के एक साथ होने की आशंका बढ़ेगी, जो किसी एक घटना से कहीं अधिक नुकसान पहुंचा सकती हैं। ये निष्कर्ष भी सामने आए 1. समुद्री हीटवेव 200 दिन तक चलेंगी समुद्री हीटवेव यानी समुद्र के तापमान का लगातार बढ़ जाना तटीय पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। 1970–2000 के बीच भारत के आसपास समुद्री हीटवेव औसतन 20 दिन प्रति वर्ष चलती थीं। लेकिन इस सदी के मध्य तक इनकी अवधि लगभग 200 दिन प्रति वर्ष तक पहुंच सकती है। 2. मानसून की औसत बारिश घटी पिछले 70 वर्षों में मानसून की औसत बारिश में 0.5 से 1.5 मिमी प्रति दिन प्रति दशक की कमी दर्ज की गई है। खासकर गंगा के मैदानी इलाकों और पूर्वोत्तर भारत में। 3. अत्यधिक बारिश की घटनाएं बढ़ीं चरम वर्षा घटनाएं (एक्सट्रीम रेनफॉल) ज्यादा तीव्र हुई हैं। 1951–2024 के बीच तटीय गुजरात में हर दशक में लगभग 0.15 अतिरिक्त बेहद तीव्र वर्षा की घटनाएं दर्ज की गईं। 4. हिमालय तेजी से गर्म हो रहा हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में 1950-2020 के दौरान तापमान 0.28 डिग्री सेल्सियस प्रति दशक की दर से बढ़ा है। 5. ग्लेशियर पिघल रहे ग्लेशियर आज पहले से लगभग दो गुना तेजी से पिघल रहे हैं। सदी के मध्य तक स्थिति बहुत ज्यादा बिगड़ सकती है।