
आदित्य-एल1 देखेगा सूरज का तूफान
भारत ने 'आदित्य-एल1' नाम का अंतरिक्ष यान सूरज के अध्ययन के लिए भेजा है। 2026 में यह यान सूरज की उच्च सक्रियता के दौरान सीएमई के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी जुटाएगा। इससे वैज्ञानिक सौर तूफानों की ताकत को समझेंगे और पृथ्वी पर तकनीकी प्रणालियों की सुरक्षा में मदद मिलेगी।
वॉशिंगटन, एजेंसी। भारत ने पिछले साल ‘आदित्य-एल1’ नाम का अंतरिक्ष यान सूरज को देखने के लिए भेजा था। 2026 का साल इस मिशन के लिए सबसे खास होने वाला है। दरअसल, यह यान सूरज को तब देखेगा, जब सूरज बहुत ज्यादा सक्रिय होगा। सूरज पर हर 11 साल में मैग्नेटिक पोल बदलते हैं और तब सूरज पर बड़ा तूफान उठता है। इस समय सूरज से कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) निकलते हैं, जो बहुत भारी चार्ज्ड पार्टिकल्स होते हैं और कभी-कभी पृथ्वी की ओर भी आते हैं। ये सीएमई सैटेलाइट, पावर ग्रिड और इंटरनेट जैसी चीजों को प्रभावित कर सकते हैं। अंतरिक्ष यान पर एक खास उपकरण कोरोनाग्राफ है, जो सूरज की चमक को रोककर उसकी बाहरी परत कोरोना को लगातार दिखाता है।
इससे वैज्ञानिक यह देख सकते हैं कि सीएमई कहां से निकल रहे हैं, उनका तापमान कितना है और वे कितने शक्तिशाली होंगे। इस जानकारी से पावर ग्रिड और सैटेलाइट को खतरे से बचाने के लिए चेतावनी दी जा सकती है। बड़े सोलर तफान धरती पर पावर ग्रिड को बंद कर सकते हैं। 1989 में कनाडा का पावर ग्रिड ठप हो गया था और 2022 में एक सीएमई ने 38 सैटेलाइट्स को नुकसान पहुंचाया था। आदित्य-एल1 मिशन से वैज्ञानिक सीएमई की ताकत को समझ पाएंगे। इससे पृथ्वी पर तकनीकी प्रणालियों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। इस तरह, 2026 आदित्य-एल 1 के लिए सबसे खास साल होगा, जब भारत सूरज के सबसे बड़े रहस्यों में से एक को करीब से देख सकेगा और सुरक्षा के लिए जरूरी जानकारी जुटा सकेगा।

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