
खेल बजट : खिलाड़ी, कोच और खेल उद्योग तीनों पर जोर
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026 के बजट में खेल को बढ़ावा देने के लिए 'खेलो इंडिया मिशन' और खेल सामान के निर्माण के लिए 500 करोड़ रुपये की घोषणा की। यह मिशन अगले 10 वर्षों में खेल प्रतिभाओं की पहचान, कोचिंग की गुणवत्ता और घरेलू खेल सामान उद्योग को मजबूत करेगा।
नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026 में खेल को लेकर सरकार ने यह साफ संकेत दे दिया है कि अब ध्यान सिर्फ पदक जीतने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे खेल तंत्र को मजबूत किया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने खेल बजट से जुड़ी दो बड़ी घोषणाएं कीं। पहली, दस सालों की दिशा तय करने वाला ‘खेलो इंडिया मिशन’, दूसरी, खेल-कूद के सामानों के निर्माण के लिए समर्पित एक पहल। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बजट भाषण में कहा, खेलो इंडिया कार्यक्रम से खेल प्रतिभाओं को निखारने की पहल को आगे बढ़ाते हुए, मैं अगले दशक में खेल क्षेत्र में आमूलचूल बदलाव करने के लिए खेलो इंडिया मिशन शुरू करने का प्रस्ताव करती हूं।
इस मिशन का मकसद अगले दस सालों में देशभर में प्रशिक्षण केंद्रों को मजबूत करना और अच्छे कोच तैयार करना है, ताकि गांव-कस्बों से लेकर शहरों तक छिपी खेल प्रतिभाओं को समय पर पहचान कर आगे बढ़ाया जा सके। पहली बार 500 करोड़ : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, मैंने खेल सामान के लिए एक समर्पित पहल का प्रस्ताव रखा है जिससे उपकरण डिजाइन के साथ-साथ सामग्री विज्ञान में विनिर्माण, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। पहली बार खेल सामान उद्योग के लिए बजट में अलग से ₹500 करोड़ रखे गए हैं, जिससे घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को रफ्तार मिलने की उम्मीद है। क्रिकेट बैट, हॉकी स्टिक, फुटबॉल, जिम उपकरण जैसे सामान अंतरराष्ट्रीय मानकों के होंगे। खेल सामान बनाने वाली छोटी-छोटी फैक्ट्रियों और एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा। आयात पर निर्भरता घटेगी और निर्यात बढ़ेगा। फायदा क्या : भारत में बनने वाले खेल सामान की गुणवत्ता बेहतर होगी। खिलाड़ियों को सस्ता और बेहतर सामान मिलेगा। युवाओं के लिए मैन्युफैक्चरिंग में रोजगार सृजित होंगे। सरकार की घोषणा को भारत को ‘स्पोर्ट्स इक्विपमेंट हब’ बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। ‘खेलो इंडिया मिशन’: 10 साल का रोडमैप वित्त मंत्री ने कहा कि खेलो इंडिया मिशन अगले एक दशक में खेल की तस्वीर बदल देगा। यह मिशन पांच मजबूत स्तंभों पर खड़ा होगा। 1. प्रतिभा की पहचान अब खिलाड़ी यूं ही भीड़ में नहीं खोएंगे। फाउंडेशन लेवल: छोटे शहरों और गांवों की शुरुआती प्रतिभाएं इंटरमीडिएट लेवल: उभरते खिलाड़ी एलीट लेवल : राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी मायने जिस खिलाड़ी में दम है, उसे समय पर सही ट्रेनिंग और मंच मिलेगा। 2. कोच होंगे ‘हाई-क्लास’ सरकार ने माना कि सिर्फ खिलाड़ी नहीं, कोच, फिजियो, फिटनेस ट्रेनर और सपोर्ट स्टाफ भी उतने ही जरूरी हैं। हाल ही में खेल मंत्रालय ने राष्ट्रीय कोच पुलेला गोपीचंद के नेतृत्व में एक कार्य बल का गठन भी किया था। क्या बदलेगा? - कोचों को आधुनिक प्रशिक्षण - ओलंपिक पोडियम कार्यक्रम जैसी योजना शुरू होगी - कोचों को भी शीर्ष खिलाड़ियों जैसी वित्तीय सहायता मिल सकेगी 3. खेल में साइंस और टेक्नोलॉजी अब खेल सिर्फ पसीना नहीं, डेटा और टेक्नोलॉजी का खेल भी है। - परफॉर्मेंस एनालिसिस - रिकवरी और फिटनेस मॉनिटरिंग - स्पोर्ट्स साइंस का इस्तेमाल फायदा: खिलाड़ी ज्यादा लंबे समय तक खेल पाएंगे और प्रदर्शन स्थिर रहेगा। 4. ज्यादा टूर्नामेंट, ज्यादा मौके खेलो इंडिया मिशन के तहत - नियमित प्रतियोगिताएं - लीग सिस्टम - मैच प्रैक्टिस के ज्यादा अवसर मायने खिलाड़ी सिर्फ ट्रायल पर नहीं, मैदान में प्रदर्शन से आगे बढ़ेंगे। 5. खेल ढांचा: घर में ही विश्वस्तरीय तैयारी - सरकार आधुनिक स्टेडियम, ट्रेनिंग सेंटर, हॉस्टल और सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करेगी। मायने खिलाड़ियों को विदेश जाने की मजबूरी कम होगी। देश में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी संभव होगी। खेल बजट का बड़ा संदेश इस साल एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स को देखते हुए यह बजट तुरंत और लंबे समय दोनों के लिए अहम है।

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