
सिद्धांतों को सुविधानुसार लागू किया जा रहा: जयशंकर
संक्षेप: भारत ने कुआलालंपुर में आसियान शिखर सम्मेलन में ऊर्जा व्यापार पर बढ़ती सख्ती और बाजार पहुंच से जुड़ी समस्याओं पर चिंता जताई। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि सिद्धांतों को सुविधानुसार लागू किया जा रहा...
नई दिल्ली, कुआलालंपुर, एजेंसी। भारत ने ऊर्जा व्यापार पर बढ़ती सख्ती, मानकों के दुरुपयोग और बाजार तक पहुंच से जुड़ी समस्या पर चिंता जताते हुए कहा है कि सिद्धांतों को सुविधानुसार लागू किया जा रहा। कुआलालंपुर में सोमवार को आसियान शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ये बात कही। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर का यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत और अमेरिका में तनातनी की स्थिति है। जयशंकर ने कहा, ऊर्जा व्यापार लगातार संकुचित हो रहा जिससे बाजार में अस्थिरता पैदा हो रही। सिद्धांतों को सुविधानुसार लागू किया जा रहा।

उन्होंने ये भी कहा कि जो कहा जाता है वो आवश्यक नहीं कि व्यवहार में लाया जाए। आपूर्ति श्रृंखलाओं की विश्वसनीयता और बाजारों तक पहुंच को लेकर चिंताए बढ़ रही हैं। तकनीकी प्रगति प्रतिस्पर्धी हो गई है और प्राकृतिक संसाधनों की तलाश इससे भी अधिक कठिन हो चली है। मौजूदा समय में जारी संघर्षों का खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर पड़ने वाले प्रभावों पर ध्यान दिलाते हुए उन्होंने कहा कि हम ऐसे संघर्ष देख रहे हैं जिनके दूरगामी प्रभाव हैं। गहरी मानवीय पीड़ा के अलावा, ये संघर्ष खाद्य सुरक्षा तंत्र को कमजोर करते हैं, ऊर्जा प्रवाह को खतरे में डालते हैं और व्यापार को बाधित करते हैं। विदेश मंत्री ने मलेशिया में साइबर ठगी केंद्रों को लेकर भी चिंता जताई, जिनमें भारतीय नागरिक भी फंसे हैं। परिवर्तन और बदलाव की अपनी गति होती है विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, परिवर्तन की अपनी एक गति होती है और दुनिया को नई परिस्थितियों के अनुसार ढलना ही होगा। बेहतरी के लिए समायोजन किए जाएंगे, नई समझ विकसित होगी, अवसर उभरेंगे तभी मजबूत समाधान तैयार होगा। तकनीक, प्रतिस्पर्धा, बाज़ार के आकार, डिजिटलीकरण, कनेक्टिविटी, प्रतिभा और गतिशीलता जैसी चीजों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। बहुध्रुवीयता न केवल कायम रहेगी बल्कि और बढ़ेगी। इन सभी पर गंभीर वैश्विक चर्चा की जरूरत है। आत्मरक्षा के अधिकार से समझौता नहीं विदेश मंत्री जयशंकर ने आतंकवाद पर कहा कि दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहनशीलता की नीति अपनानी चाहिए क्योंकि इस खतरे के खिलाफ रक्षा का अधिकार कभी समझौते का विषय नहीं हो सकता। आतंकवाद एक निरंतर और विध्वंसक खतरा बना हुआ है। इससे निपटने के लिए अस्पष्ट नीति की कोई गुंजाइश नहीं है। आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अधिकार से कभी समझौता नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, भारत गाजा शांति योजना का स्वागत करता है। उम्मीद है यूक्रेन युद्ध जल्द खत्म होगा। समुद्री सहयोग बढ़ाने को हम प्रतिबद्ध जयशंकर ने कहा, भारत पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन (ईएएस) की गतिविधियों और उसकी भावी दिशा का पूरा समर्थन करता है। समुद्री सहयोग आगे बढ़ाने के लिए हमारी प्रतिबद्धता मजबूत है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 को आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत गुजरात के प्राचीन बंदरगाह लोथल में समुद्री धरोहर महोत्सव आयोजित करने का प्रस्ताव रखता है। साथ ही हम समुद्री सुरक्षा सहयोग पर सातवां ईएएस सम्मेलन भी आयोजित करना चाहते हैं। रुबियो से कई मसलों पर चर्चा विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कुआलालंपुर में आसियान सम्मेलन से अलग सोमवार को अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों, भारत- अमेरिका के बीच चल रहे व्यापारिक समझौते, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट में कहा कि अमेरिकी समकक्ष के साथ कई मसलों पर सार्थक चर्चा हुई है। मालूम हो कि भारत- अमेरिका के बीच व्यापारिक समझौता अंतिम चरण में है। इस दिशा में पांच दौर की बैठक पूरी हो चुकी है। मलेशिया से म्यांमार पर बात विदेश मंत्री एस जयशंकर ने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन और मलेशिया के विदेश मंत्री से भी मुलाकात की। एक्स पर पोस्ट में उन्होंने बताया कि भारत- न्यूजीलैंड संबंधों को नया आयाम देने के मसले पर बात हुई। मलेशिया के विदेश मंत्री मो. हाजी हसन के साथ म्यांमार समेत अन्य मसलों पर बात हुई। ............

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