तैयारी : खाद्य वस्तुओं की गुणवत्ता जांच केंद्रीय निगरानी में होगी
मिंट का लोगो प्रियंका शर्मा नई दिल्ली। देश में खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता

नई दिल्ली। देश में खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता जांच और निगरानी व्यवस्था में बड़ा बदलाव हो सकता है। केंद्र सरकार ऐसी नई व्यवस्था लाने की तैयारी कर रही है, जिसमें खाद्य पदार्थों की निगरानी का काम केंद्रीय स्तर पर किया जाएगा और राज्यों की भूमिका सीमित हो जाएगी। इसके लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) नई प्रणाली तैयार कर रहा है। मामले से जुड़े दो वरिष्ठ अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उनके मुताबिक, अभी राज्यों के खाद्य सुरक्षा अधिकारी (एफएसओ) ही बाजार से खाद्य नमूने लेकर जांच करते हैं और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी करते हैं। लेकिन सरकार का मानना है कि अलग-अलग राज्यों में नियमों को लागू करने का तरीका अलग है। इससे कई बार मनमानी कार्रवाई और पारदर्शिता की कमी की शिकायतें सामने आती हैं।
क्या है प्रस्ताव
इसी वजह से अब सरकार निगरानी और कानूनी कार्रवाई की जिम्मेदारियों को अलग करने पर विचार कर रही है। प्रस्ताव के मुताबिक सामान्य निगरानी और सैंपलिंग का काम केंद्र के अधीन एफएसएसएआई के जरिए किया जा सकता है, जबकि कानूनी कार्रवाई की जिम्मेदारी राज्य अधिकारियों के पास रह सकती है। हाल ही में एफएसएसएआई की केंद्रीय सलाहकार समिति की बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई। इसमें राज्यों के खाद्य सुरक्षा आयुक्त भी शामिल हुए। अब अगली बैठक में इस नई व्यवस्था का विस्तृत खाका पेश किया जा सकता है।
पूरे देश में एक जैसी निगरानी
मामले से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, सरकार का कहना है कि इससे पूरे देश में एक जैसी निगरानी व्यवस्था लागू होगी और खाद्य गुणवत्ता पर बेहतर नजर रखी जा सकेगी। साथ ही कारोबारियों के खिलाफ मनमानी कार्रवाई की शिकायतें भी कम हो सकती हैं। मौजूदा समय में देश में करीब तीन हजार खाद्य सुरक्षा अधिकारी काम कर रहे हैं। ये अधिकारी बाजार से नमूने लेकर जांच करते हैं और मिलावट या खराब गुणवत्ता मिलने पर कार्रवाई शुरू करते हैं।
आम लोगों पर क्या असर होगा
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह नई व्यवस्था लागू होती है, तो खाने-पीने की चीजों की जांच पूरे देश में अधिक एकरूप और पारदर्शी हो सकती है। मिलावटी और घटिया खाद्य पदार्थों की पहचान तेजी से हो सकेगी और उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ेगा। साथ ही कंपनियों और कारोबारियों को भी अलग-अलग राज्यों में अलग नियमों और कार्रवाई के डर से राहत मिल सकती है। हालांकि कुछ राज्यों को अपनी शक्तियां सीमित होने की चिंता भी हो सकती है।
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