केंद्र सरकार 10 लाख श्रमिकों को ‘मास्टर ट्रेनर’ बनाएगी
केंद्र सरकार बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में काम कर रहे श्रमिकों को 'मास्टर ट्रेनर' बनाने के लिए कौशल विकास कार्यक्रम शुरू करने जा रही है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में 10 लाख श्रमिकों को प्रशिक्षित करना है। प्रमाणित श्रमिकों की कमाई में 20 से 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी की उम्मीद है।

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। केंद्र सरकार बुनियादी ढांचा क्षेत्र में काम कर रहे लाखों श्रमिकों को ‘मास्टर ट्रेनर’ बनाने जा रही है। उनके लिए कौशल विकास कार्यक्रम चलाया जाएगा। दावा है कि हुनरमंद श्रमिक अकुशल श्रमिकों की तुलना में 30 फीसदी तक अधिक कमाई करेंगे। सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इसकी शुरुआत राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों से होने जा रही है। योजना की खासियत यह है कि इसमें बाहर से प्रशिक्षक नहीं आएंगे, बल्कि अनुभवी श्रमिकों को ही उनकी दक्षता के आधार पर मास्टर ट्रेनर बनाया जाएगा। देश के बुनियादी ढांच क्षेत्र में यह अब तक का सबसे बड़ा कौशल विकास अभियान माना जा रहा है।
उन्होंने बताया कि अगले कुछ वर्षों में देश के लगभग 10 लाख से अधिक श्रमिकों को प्रत्यक्ष रूप से इस कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है। प्रशिक्षण के बाद मिलेगा प्रमाणपत्र सड़क मंत्रालय का लक्ष्य है कि हर बड़े प्रोजेक्ट साइट पर कम से कम पांच से 10 प्रतिशत श्रमिकों को उच्च-स्तरीय प्रशिक्षण दिया जाए। प्रशिक्षण के बाद श्रमिकों को भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त सर्टिफिकेट दिया जाएगा, जो उनकी दक्षता का आधिकारिक प्रमाण होगा। अधिकारी ने बताया कि यह कार्यक्रम सिर्फ प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, इसका सीधा संबंध श्रमिकों की जेब से है। एक अकुशल श्रमिक की तुलना में प्रमाणित कुशल श्रमिक की दिहाड़ी और मासिक वेतन में 20 से 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। मास्टर ट्रेनरों को मिलेगा विशेष भत्ता जो श्रमिक मास्टर ट्रेनर बनेंगे, उन्हें न केवल विशेष भत्ता मिलेगा, बल्कि उनकी भूमिका सुपरवाइजर के स्तर की हो जाएगी। ‘स्किल्ड लेबर’ की मांग हमेशा अधिक रहती है। सर्टिफिकेट होने से श्रमिकों को एक प्रोजेक्ट खत्म होने के बाद दूसरे बड़े प्रोजेक्ट्स में प्राथमिकता के आधार पर काम मिलेगा। इसका दूसरा बड़ा फायदा यह होगा कि प्रशिक्षित श्रमिक जब काम करेंगे, तो सड़कों की क्वालिटी बेहतर होगी और निर्माण के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं में कमी आएगी। आधुनिक तकनीकों को संभालने का मौका अधिकारी ने बताया कि श्रमिकों को नई मशीनों और ग्रीन हाईवे जैसी आधुनिक तकनीकों को संभालने का मौका मिलेगा। मजदूर से मास्टर ट्रेनर बनने का सफर श्रमिकों को सामाजिक सम्मान और आर्थिक स्थिरता प्रदान करेगा। अब भारत की सड़कें सिर्फ शहरों को नहीं जोड़ेंगी, बल्कि उन्हें बनाने वालों के सुनहरे भविष्य का रास्ता भी तैयार करेंगी।

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