
भारत-जापान वैश्विक व्यवस्था को आकार देने में सक्षम : जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और जापान के बीच की रणनीतिक साझेदारी निरंतर प्रगति कर रही है। दोनों देशों ने व्यापार, रक्षा, और उच्च प्रौद्योगिकी में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। बैठक में महत्वपूर्ण खनिजों पर संयुक्त कार्य समूह और एआई पर संवाद तंत्र की शुरुआत का निर्णय लिया गया।
नई दिल्ली, एजेंसी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि भारत और जापान के बीच विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी निरंतर प्रगति कर रही है। इसमें विश्व व्यवस्था को आकार देने तथा अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को जोखिममुक्त करने की अपार क्षमता है। जयशंकर ने दिल्ली में जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी के साथ 18वें भारत–जापान रणनीतिक संवाद कार्यक्रम की सह-अध्यक्षता की। चर्चा के दौरान दोनों देशों ने व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों, रक्षा और उच्च प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। बैठक में दोनों पक्षों ने महत्वपूर्ण खनिजों पर संयुक्त कार्य समूह गठित करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर एक संवाद तंत्र शुरू करने का फैसला किया।
बैठक के दौरान अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा कि हिंद-प्रशांत को लेकर भारत का दृष्टिकोण जापान की ‘स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत’ की अवधारणा से काफी हद तक मेल खाता है। उन्होंने कहा कि हम अग्रणी लोकतंत्र हैं, विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं हैं और आज हमारे पास न केवल अवसर है, बल्कि वैश्विक व्यवस्था को आकार देने की जिम्मेदारी और कर्तव्य भी है। आर्थिक सुरक्षा को विशेष रूप से बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि दोनों को यह तय करना है अपनी अर्थव्यवस्था के जोखिम को कैसे कम किया जाए और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के जोखिम को कैसे घटाया जाए। बैठक के बाद ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि अर्थव्यवस्था, आपूर्ति शृंखला, महत्वपूर्ण खनिजों, प्रौद्योगिकी और जन-जन के संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर हुई चर्चा दोनों देशों के साझा हितों को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत सहित क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ। जयशंकर ने कहा कि हमारी विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। इसमें विश्व व्यवस्था को आकार देने और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को जोखिममुक्त करने की अपार क्षमता है। जापान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता तोशिहिरो कितामुरा ने बताया कि जयशंकर और मोटेगी ने वैश्विक मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श किया और ‘क्वाड’ के महत्व पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने पर गहन चर्चा हुई और इस क्रम में महत्वपूर्ण खनिजों पर संयुक्त कार्य समूह बनाने पर सहमति बनी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने कहा कि दोनों मंत्रियों ने भारत–जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि एआई संवाद की शुरुआत इस क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को नई गति देने के उद्देश्य से की गई है। साथ ही आर्थिक सुरक्षा पहल के तहत दुर्लभ खनिजों और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए संयुक्त कार्य समूह बुलाने का निर्णय लिया गया है।

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