होर्मुज पर दोहरी नाकेबंदी से भारत के लिए चुनौतियां बढ़ेंगी
अमेरिका और ईरान की नाकेबंदी ने भारत के लिए आर्थिक और रणनीतिक चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। भारत कच्चा तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आयात करता है। महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है, जबकि भारत ने रूस से तेल खरीद शुरू की है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अपनी ऊर्जा रणनीति में बदलाव करना होगा।

नई दिल्ली, एजेंसी। होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका तथा ईरान दोनों की नाकेबंदी ने भारत के लिए नई आर्थिक और रणनीतिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) और गैस इसी रास्ते से आयात करता है। इस नाकेबंदी से भारत में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इस अहम समुद्री मार्ग पर आने-जाने वाले जहाजों को रोकने की मंजूरी देने के बाद स्थिति और जटिल हो गई है। इससे पहले ईरान भी इस मार्ग को बंद कर चुका था, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल मच गई थी और तेल की कीमतों में तेज उछाल आया था।
ईरान की इस नाकेबंदी के कारण भारत की आपूर्ति श्रृंखला पहले ही प्रभावित हो चुकी है। हालांकि भारत और ईरान के पुराने कूटनीतिक संबंधों के चलते भारतीय ध्वज वाले कुछ जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति मिल गई थी। लेकिन अब अमेरिका की ओर से भी रोक लगाए जाने से स्थिति और जटिल हो गई है, जिससे वैश्विक व्यापार और शिपिंग पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।रूस से तेल खरीद का विकल्पइस स्थिति के बीच भारत ने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर रूस से तेल खरीद फिर शुरू की है। हालांकि, इसके लिए अमेरिका से मिली छूट की अवधि समाप्त हो चुकी है और भारत ने इसे बढ़ाने का अनुरोध किया है। अगर यह अनुमति नहीं मिलती है, तो भारत के सामने कूटनीतिक चुनौती खड़ी हो सकती है, क्योंकि रूस से तेल खरीदने पर अमेरिका के साथ संबंध प्रभावित हो सकते हैं।महंगाई का संकटइस संकट का सबसे बड़ा असर तेल की कीमतों के जरिए दिखाई दे सकता है। तेल महंगा होने पर भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे परिवहन लागत बढ़ेगी और इसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ेगा। यानी महंगाई बढ़ने का खतरा है। इसके अलावा शिपिंग लागत और बीमा प्रीमियम बढ़ने से आयात-निर्यात भी महंगा हो सकता है। अभी देश में सामान्य पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर हैं लेकिन वैश्विक वित्तीय सेवा एजेंसी मैक्वेरी का अनुमान है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे प्रमुख राज्यों में चुनाव के बाद ईंधन की खुदरा कीमतों में वृद्धि हो सकती है।सरकार ने कहा, संकट नहींपेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार देश में एलपीजी, पाइप गैस और सीएनजी की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और कहीं भी कमी की स्थिति नहीं है। सरकार ने घरेलू उपयोग को प्राथमिकता देने के साथ-साथ अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी पर्याप्त ईंधन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है।क्या कहते हैं विशेषज्ञइस मामले में विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका और ईरान की दोहरी नाकेबंदी ने भारत के सामने ऊर्जा सुरक्षा, महंगाई और कूटनीतिक संतुलन-तीनों मोर्चों पर गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन अगर तनाव बढ़ता है तो इसका असर और गहरा हो सकता है। भारत को अपनी ऊर्जा रणनीति में बदलाव करना होगा। वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की तलाश, भंडारण क्षमता बढ़ाना और ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करना जरूरी हो सकता है।रूस से भारत का कच्चा तेल आयात तीन गुनाभारत की मार्च, 2026 में रूस से कच्चे तेल की खरीद तीन गुना से अधिक होकर 5.3 अरब यूरो रही है। यह वृद्धि आयात मात्रा दोगुनी होने और वैश्विक तेल कीमतों में उछाल के कारण हुई। यूरोपीय शोध संस्था सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी में खरीद में गिरावट के बाद मार्च में भारत ने रूस से तेल की खरीद फिर तेज कर दी। रिपोर्ट में कहा गया कि मार्च, 2026 में भारत रूस से जीवाश्म ईंधन खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश रहा। इस दौरान भारत ने कुल 5.8 अरब यूरो के रूसी ईंधन उत्पादों का आयात किया, जिनमें कच्चे तेल की हिस्सेदारी 91 प्रतिशत (5.3 अरब यूरो) रही। शेष आयात में कोयला (33.7 करोड़ यूरो) और पेट्रोलियम उत्पाद (17.85 करोड़ यूरो) शामिल रहे।
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