खेल : सेमीफाइनल का टिकट कटाने के लिए चीनी ताइपे से भिड़ेगा भारत
भारतीय पुरुष शटलर थॉमस कप के क्वार्टर फाइनल में चीनी ताइपे से भिड़ेंगे। भारत ने चार साल पहले खिताब जीता था, जबकि ताइपे ने कभी भी यह खिताब नहीं जीता। भारत ग्रुप ए में दूसरे स्थान पर रहकर अंतिम आठ में पहुंचा है। दोनों टीमों की चुनौतियाँ और प्रदर्शन पर नजर है।

सेमीफाइनल का टिकट कटाने के लिए चीनी ताइपे से भिड़ेगा भारत थॉमस कप
होर्सेंस (डेनमार्क), एजेंसी। भारतीय पुरुष शटलर विश्व टीम चैंपियनशिप थॉमस कप फाइनल्स के क्वार्टर फाइनल मुकाबले में शुक्रवार को चीनी ताइपे की मजबूत टीम से भिड़ेंगे। भारत ने चार साल पहले अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल करते हुए खिताब जीता था। दूसरी ओर चीनी ताइपे कभी यह खिताब नहीं जीता है।
भारत की स्थिति
भारत ने 1952, 1955 और 1979 में कांस्य पदक भी जीते हैं। इस बार भारत ग्रुप ए में दूसरे स्थान पर रहकर अंतिम आठ में पहुंचा है। भारत ने पहले मैच में कनाडा को 4-1 से हराया। टीम ने फिर ऑस्ट्रेलिया का 5-0 से शिकस्त दी लेकिन चीन से उसे 2-3 से हार का सामना करना पड़ा।
चीनी ताइपे की चुनौती
मुश्किल चुनौती : चीनी ताइपे की मजबूत टीम की अगुआई दुनिया के नंबर छठे नंबर के एकल खिलाड़ी चोउ टिएन चेन कर रहे हैं। उनके साथ दुनिया के आठवें नंबर के खिलाड़ी और मौजूदा ऑल इंग्लैंड चैंपियन लिन चुन-यी और दुनिया के 21वें नंबर के ची यू जेन टीम की चुनौती को बेहद मजबूत बनाते हैं। युगल में ताइपे के पास चिउ सियांग चीह और वांग ची-लिन की दुनिया की 14वें तथा ली झे-हुई और यांग पो-सुआन की दुनिया की नंबर 16वें नंबर की जोड़ी है।
भारत का प्रदर्शन
भारत अच्छी लय में : दूसरी ओर भारत की टीम अच्छी लय में नजर आ रही है। उसके एकल और युगल दोनो खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। आयुष शेट्टी ने बैडमिंटन एशिया की अपनी बेहतरीन लय यहां बरकरार रखी है। उस चैंपियनशिप में तीनों मैच जीतकर वह उपविजेता रहे थे।
श्रीकांत ने चीन के लू गुआंग झू के खिलाफ पिछड़ने के बाद जबरदस्त वापसी करके जीत दर्ज की। ऑल इंग्लैंड के फाइनल में पहुंचे लक्ष्य सेन भले ही तीन गेम वाले दो रोमांचक मुकाबले हार गए हों लेकिन उन्होंने सबको प्रभावित किया है। अब जब उनका मुकाबला नाराओका से होगा तो भारत की जीत काफी हद तक उन्हीं पर निर्भर करेगी। हालांकि वह इस प्रतिद्वंद्वी से छह बार हार चुके हैं।
सात्विकसाईराज रांकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की युगल जोड़ी चीन के लियांग वेई केंग और वांग चांग से हार गई थी। सात्विक के कंधे की चोट से उबरने के बाद यह उनका पहला टूर्नामेंट था। हरिहरन अमसाकरुणन और एमआर अर्जुन की दूसरी युगल जोड़ी ने भी अपने तीन में से दो मैच जीते हैं।
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