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यूरोपीय संघ से मुक्त व्यापार समझौता जल्द

यूरोपीय संघ से मुक्त व्यापार समझौता जल्द

संक्षेप:

भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) अंतिम चरण में है। 16 दौर की वार्ता के बाद, बाजार पहुंच, शुल्क कटौती और निवेश संरक्षण पर सहमति बनी है। एफटीए के लागू होने से द्विपक्षीय व्यापार में 30-40% की बढ़ोतरी संभव है, जिससे रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।

Jan 01, 2026 05:38 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से चल रही वार्ता अब अंतिम चरण में पहुंच गई है और समझौते के जल्द संपन्न होने की संभावना जताई जा रही है। दोनों पक्षों के बीच अब तक 16 दौर की वार्ता हो चुकी है। हालिया दौर की बातचीत में बाजार पहुंच, शुल्क कटौती, निवेश संरक्षण, सेवाओं के व्यापार और बौद्धिक संपदा अधिकार जैसे अहम मुद्दों पर काफी हद तक सहमति बन चुकी है। शेष बचे संवेदनशील विषयों पर भी समाधान की दिशा में प्रगति हुई है।

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इस समझौते के लागू होने से भारत के कपड़ा, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, आईटी और कृषि-आधारित उत्पादों को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत–ईयू एफटीए से द्विपक्षीय व्यापार और निवेश में बढ़ोतरी होगी। इसके साथ ही, आपूर्ति श्रृंखलाएं मजबूत होने की दिशा में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक सहयोग बढ़ने से साझा लाभ होंगे। सूत्रों का कहना है कि समझौते कीआधिकारिक घोषणा से पहले अंतिम तकनीकी और कानूनी पहलुओं को सुलझाया जा रहा है। व्यापार में 30-40 फीसदी बढ़ोतरी संभव मौजूदा समय में द्विपक्षीय व्यापार करीब 120 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 10 लाख करोड़ रुपये) के स्तर पर है। एफटीए के लागू होने के बाद द्विपक्षीय व्यापार में 30 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी संभव है। अगले कुछ वर्षों में दोनों पक्षों का व्यापार 170–190 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है। भारत के लिहाज से देखा जाए तो टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट्स, फार्मा, इंजीनियरिंग गुड्स, आईटी और प्रोफेशनल सेवाओं को बड़ा फायदा मिलने की संभावना है। वहीं, यूरोपीय संघ को भारत के ऑटोमोबाइल, ग्रीन टेक्नोलॉजी, मशीनरी और निवेश क्षेत्र में बेहतर बाजार पहुंच मिलेगी। शुल्क कटौती, नियमों के सरलीकरण और निवेश संरक्षण से न सिर्फ व्यापार बढ़ेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर और सप्लाई चेन मजबूत होने में भी मदद मिलेगी।