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चीनी चुनौती के चलते भूटान से गहरे रिश्ते जरूरी

चीनी चुनौती के चलते भूटान से गहरे रिश्ते जरूरी

संक्षेप: भारत-भूटान के रिश्ते गहरे हैं, लेकिन डोकलाम विवाद के बाद भारत सतर्क है। भूटान के पक्ष में खड़ा होकर भारत चीन के दखल को सीमित करने का प्रयास कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की भूटान यात्रा और ऊर्जा, सामाजिक विकास में सहयोग से दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत हो रहे हैं।

Tue, 11 Nov 2025 06:22 PMNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। भारत-भूटान के रिश्ते हालांकि पहले से ही गहरे रहे हैं लेकिन डोकलाम विवाद के बाद भारत विशेष रूप से सतर्क है। उसकी पूरी कोशिश रही है कि चीन का दखल वहां ज्यादा नहीं बढ़े। भूटान और चीन के बीच जारी सीमा विवाद में भी भारत भूटान के पक्ष में खड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूटान यात्रा दोनों देशों के संबंधों को प्रगाढ़ बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगी। वैसे तो भारत की 699 किलोमीटर सीमा भूटान से लगती है लेकिन सबसे अहम डोकलाम में चीन-भूटान और भारत का ट्राई जंक्शन बिंदु है। चीन इस क्षेत्र पर दावा ठोकता रहा है लेकिन भूटान इसे अपना क्षेत्र मानता है।

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चीन ने 2017 में जब इस क्षेत्र में सड़क बनाने की कोशिश की तो भारत डटकर भूटान के साथ खड़ा रहा। दरअसल, यह क्षेत्र सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी चिकन नेक के करीब है। इसलिए ट्राई जंक्शन बिन्दु भारत के लिए संवेदनशील है। डोकलाम विवाद के दौरान भारत चीन को स्पष्ट संकेत देने में सफल रहा कि वह अपनी सुरक्षा के साथ कोई भी समझौता नहीं करेगा। भूटान के साथ भारत के राजनयिक रिश्ते हालांकि 1968 में स्थापित हुए थे लेकिन दोनों देशों के बीच मित्रता और सहयोग समझौता 1949 से है। भारत ने हमेशा भूटान को विशेष तरजीह दी है। 2014 और 2019 में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले भूटान की यात्रा की थी। 2024 के आम चुनाव से पहले भी मोदी भूटान गए थे और तब भूटान ने उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान किया था। यह सम्मान पाने वाले मोदी पहले विदेशी नागरिक थे। भूटान के नरेश और प्रधानमंत्री भी लगातार भारत की यात्राएं करते रहे हैं, जो दोनों देशों के गहरे होते रिश्तों के संकेत हैं। ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़ा साझीदार भूटान भारत का ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़ा साझीदार है। दोनों देशों ने ऊर्जा भागीदारी को लेकर साझा विजन जारी किया है। मौजूदा समय में दोनों देश 3156 मेगावाट के 5 हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट बना रहे हैं। हाल में 1200 मेगावाट की एक नई परियोजना पर भी सहमति बनी है। भारत ने भूटान को बिजली बेचने और खरीदने की अनुमति भी दे रखी है। सामाजिक विकास एवं पर्यटन भारत सामाजिक विकास में भूटान का बेहद करीबी साझीदार है। विभिन्न पंचवर्षीय योजनाओं के लिए उसे 21 हजार करोड़ की सहायता प्रदान की गई है। इससे वहां सैकड़ों परियोजनाएं चल रही हैं। भूटान और भारत के बीच नागरिक संबंध भी मजबूत हैं। 50 हजार भारतीय वहां काम या व्यवसाय कर रहे हैं। पर्यटन के लिए भूटान जाने का रुझान भी भारतीयों में बढ़ रहा है। व्यापार बढ़ने की अपार संभावनाएं दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं। अभी द्विपक्षीय व्यापार 12,669 करोड़ रुपये है। दोनों देशों में व्यापार समझौता है। भारत ने भूटान को भारत के जरिये तीसरे देश के साथ भी व्यापार करने की अनुमति दे रखी है। व्यापार बढ़ाने के लिए हाल में दो रेल लिंक को भी मंजूरी मिली है जिनमें कोकराझार-गिलेफू और बनारहाट-समत्से रेल लिंक शामिल हैं। इन पर भारत सरकार चार हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है।