कैबिनेट फैसले: भारत दुर्लभ पृथ्वी स्थायी मैग्नेट के मामले में चीन पर खत्म करेगा निर्भरता
केंद्र सरकार ने दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबकों की मैन्युफैक्चरिंग के लिए 7,280 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना और उच्च तकनीक में भारत की क्षमताओं को बढ़ाना है। यह योजना सात वर्षों में लागू होगी और भारत को वैश्विक बाजार में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाएगी।

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। केंद्र सरकार ने रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबकों) की मैन्युफैक्चरिंग लिए 7,280 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना को बुधवार को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में योजना को मंजूरी दी गई। इसके तहत आने वाले सात वर्षों में दुर्लभ पृथ्वी खनिज की खोज व विनिर्माण पर काम किया जाएगा। इस योजना से दुर्लभ पृथ्वी स्थायी मैग्नेट के मामले में चीन पर से भारत की निर्भरता धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट में लिए फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि योजना का मकसद आयात पर निर्भरता कम करना और उच्च तकनीक में भारत की क्षमताओं को बढ़ाना है।
यह बहुत बड़ा फैसला है जो रणनीति रूप से काफी अहम है। स्थायी चुंबकों की देश में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सुविधा तैयार हो, इसके लिए केंद्र सरकार ने योजना को मंजूर किया है। - इन जगहों पर उपयोग स्थायी चुंबकें काफी अहम होती हैं। इसका उपयोग इलेक्ट्रिक व्हीकल, रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों, एयरोस्पेस समेत कई क्षेत्रों में होता है मेडिकल उपकरणों में कई जगह स्थायी मैग्नेट का उपयोग किया जाता है। उसके बिना उपकरण बन ही नहीं सकता। भारत में लगातार इसकी मांग बढ़ती जा रही है। -- भारत में कई जगह पर रेयर अर्थ उपलब्ध केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने बताया कि भारत में ओडिशा, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, गोवा और गुजरात के समुद्रीय तट क्षेत्र दुर्लभ पृथ्वी स्थायी मैग्नेट के भंडार हैं। इसके अलावा, गुजरात और महाराष्ट्र के पहाड़ी इलाकों में भी ऐसा ही है। परमानेंट मैग्नेट हल्के और भारी रेयर अर्थ को मिलाकर बनाए जाएंगे। इन खनिज को माइन, प्रोसेस और रिफाइन करना मुश्किल है, लेकिन अब योजना के जरिये उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हम ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ उत्पादन पर काम करेंगे। क्योंकि इन दोनों देशों के पास काफी अच्छी तकनीक है। ------------ क्या है मौजूदा स्थिति वर्तमान समय में वैश्विक रेयर अर्थ मैग्नेट सप्लाई व्यवस्था पर चीन का काफी कब्जा है। दुनिया की जरूरत का करीब 80-90 फीसदी तक अकेले चीन सप्लाई करता है, लेकिन इस वर्ष की शुरुआत में वैश्विक बाजार में कड़े प्रतिबंधों के बीच चीन ने दुर्लभ पृथ्वी खनिज को लेकर लाइसेंस से जुड़ी प्रक्रिया को सख्त किया है। इसके बाद वैश्विक बाजार में रेयर अर्थ की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसका असर भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक और अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ता दिखाई देता है। -------------- उत्पादन क्षमता को प्रति वर्ष 6,000 मीट्रिक टन करना लक्ष्य भारी उद्योग मंत्रालय का कहना है कि योजना के जरिये भारत में 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) इंटीग्रेटेड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (आरईपीएम) मैन्युफैक्चरिंग स्थापित करना है, जिससे आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। इससे भारत वैश्विक आरईपीएम बाजार में एक अहम खिलाड़ी के तौर पर उभरेगा। दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबकों के उत्पाद को लेकर उद्योग जगत उत्साहित है। कई कंपनियां उत्पादन करने को सहमत हैं। मौजूदा समय में देश में जितना भी स्थायी चुंबकें उपलब्ध होती हैं वह कहीं न कहीं से आयात होकर आती हैं। इस योजना से आने वाले वर्षों में आयात निर्भरता खत्म होगी। ------------- योजना की अहम बातें - इस योजना की अवधि सात वर्ष की होगी। - पहले दो साल का समय दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबक (आरईपीएम) के संयंत्र स्थापित करना होगा। - अगले पांच वर्ष बिक्री पर प्रोत्साहन देने के लिए निर्धारित किए गए हैं। - मौजूदा समय में भारत की जरूरत चार से पांच हजार मीट्रिक टन प्रति वर्ष की। - योजना के तहत अगल पांच वर्ष में छह हजार मीट्रिक टन की होगी, जो आगे चलकर बढ़ती जाएगी। ------------- कैबिनेट फैसले-2 पुणे मेट्रो के विस्तार को कैबिनेट की मंजूरी केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 9,858 करोड़ रुपये की लागत से पुणे मेट्रो रेल नेटवर्क के विस्तार को भी मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि बैठक में पुणे मेट्रो रेल परियोजना के दूसरे चरण के तहत लाइन 4 (खराड़ी-हडपसर-स्वारगेट-खड़कवासला) और लाइन 4ए (नल स्टॉप-वारजे-माणिक बाग) को मंजूरी दी गई। वैष्णव ने बताया कि लाइन 2ए (वनाज-चांदनी चौक) और लाइन 2बी (रामवाड़ी-वाघोली-विट्ठलवाड़ी) को मंजूरी मिलने के बाद, दूसरे चरण के तहत स्वीकृत यह दूसरी बड़ी परियोजना है। कुल 28 एलिवेटेड स्टेशनों के साथ 31.636 किलोमीटर लंबी, लाइन 4 और 4ए पूर्व, दक्षिण और पश्चिम पुणे में आईटी केंद्रों, वाणिज्यिक क्षेत्रों, शैक्षणिक संस्थानों और आवासीय समूहों को जोड़ेगी। यह परियोजना पांच वर्षों में पूरी होगी और इसकी अनुमानित लागत 9857.85 करोड़ रुपये होगी। इसका वित्तपोषण भारत सरकार, महाराष्ट्र सरकार और बाह्य द्विपक्षीय-बहुपक्षीय वित्तपोषण एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा।
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