
रूसी राष्ट्रपति का दौरा: ट्रंप के टैरिफ के बीच रूस से संबंध व्यापार को बढ़ाएंगे
भारत और रूस के बीच व्यापार और ऊर्जा समेत 25 से अधिक समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। पुतिन के दौरे का उद्देश्य दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करना है। रूस भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापार भागीदार है, और दोनों देशों का लक्ष्य 2030 तक आपसी व्यापार को 100 अरब डॉलर तक बढ़ाना है।
व्यापार और ऊर्जा समेत 25 से ज्यादा समझौतों पर लगेगी मुहर व्यापार और रक्षा समझौते प्रमुख एजेंडे में इनपर होगी बातचीत -रक्षा और सुरक्षा पर समझौते -ऊर्जा और तेल आयात पर बातचीत होगी -व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी नई दिल्ली, एजेंसी। रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन चार साल पहले जब भारत आए थे तो दुनिया के हालात अलग थे। वर्तमान भारत दौरे को, ट्रंप के टैरिफ और दुनियाभर में भू-राजनीतिक तनाव के बीच, दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। एनालिस्ट्स ने मानते हैं कि पुतिन का भारत दौरा दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्तों की निशानी है और यह संदेश भी है कि कोई भी अमेरिका के दबाव में नहीं झुकेगा।
पुतिन के दौरे में व्यापार और ऊर्जा सहित 25 समझौते होने की उम्मीद है। इनमें 10 अंतर-सरकारी और 15 वाणिज्यिक समझौते होने की संभावना है। रूस भारत का चौथा बड़ा व्यापार भागीदार रूस भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापार भागीदार है। 2024-25 में दोनों देशों के बीच ट्रेड रिकॉर्ड 68.7 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। हालांकि, 90 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा रूस से भारत के आयात का है। रूस से भारत ने 63.8 अरब डॉलर का आयात किया है। इसमें मुख्य रूप से ईंधन और तेल शामिल हैं। भारत मुख्य रूप से न्यूक्लियर रिएक्टर और मशीनरी और कुछ फार्मास्यूटिकल्स निर्यात करता है। दोनों देशों का लक्ष्य 2030 तक आपसी व्यापार को 100 अरब डॉलर तक बढ़ाना है। इनपर होगी बातचीत ऊर्जा और तेल आयात: यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत रूसी तेल का एक बड़ा खरीदार बनकर उभरा। 2024 में, रूस ने भारत के कुल क्रूड इम्पोर्ट का लगभग 36 परसेंट, यानी हर दिन लगभग 1.8 मिलियन बैरल तेल सप्लाई किया। इससे भारत के अरबों डॉलर बचे। रक्षा और सुरक्षा पर समझौते: रूस भारत के सबसे बड़े हथियार आपूर्तिकर्ता में से एक बना हुआ है। हालांकि भारत यूएस, फ्रांस और इजरायल से भी हथियार खरीदता है। साथ ही, भारत ने घरेलू उत्पादन भी बढ़ाया है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) के अनुसार, भारत के हथियार आयात में रूस का हिस्सा 2009-13 में 76 परसेंट से घटकर 2019-23 में 36 परसेंट हो गया। ये डील संभव -भारत एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम के नए सेट खरीद सकता है -सुखोई-57 फाइटर जेट के भारत के साथ सह-उत्पादन पर फैसला -रूस के पैंटसीर एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने पर चर्चा -वोरोजनेज रडार की डील भी एजेंडे में अन्य समझौते -दोनों देशों की नौसेनाएं समुद्री अभ्यास बढ़ाएंगी -भारत का रूपे कार्ड रूस में और रूस का एमआईआर कार्ड भारत में चलेगा -यूपीआई और रूस के पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने पर चर्चा -भारतीय मजदूरों को रूस में नौकरी के लिए नया समझौता हो सकता है भारत और रूस के बीच व्यापार वर्ष कुल व्यापार 2024-25 68.7 अरब डॉलर(अनुमानित) 2023-24 61.6 अरब डॉलर 2022-23 49.8 अरब डॉलर 2021-22 13.2 अरब डॉलर 2020-21 8.1 अरब डॉलर भारत रूस से क्या खरीदता है? - कच्चा तेल -पेट्रोलियम उत्पाद -ऊवर्रक और खनिज भारत का रूस को निर्यात - फार्मास्यूटिकल्स -रसायन -टेक्सटाइल -मशीनरी और इंजीनियरिंग के सामान -खेती के उत्पाद दोनों तरफ से निवेश में बढ़ोत्तरी हुई रूस में भारत का निवेश 16 अरब डॉलर होने का अनुमान है, जो मुख्य रूप से तेल और गैस तथा फार्मास्यूटिकल्स में है। भारत में रूस का निवेश करीब 20 अरब डॉलर है, जिसमें पेट्रोकेमिकल्स, स्टील, रेलवे, बैंकिंग और एनर्जी जैसे सेक्टर शामिल हैं। दोनों पक्षों ने पहले 2025 तक 50 अरब डॉलर के निवेश का लक्ष्य रखा था। संस्थागत तंत्र संबंधों को मजबूत कर रहे भारत और रूस के बीच आर्थिक और अन्य सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक मजबूत संस्थागत ढांचा काम कर रहा है। प्रमुख संस्थाओं में व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग पर भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (आईआरआईजीसी-टीईसी) द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग के प्रबंधन का मुख्य मंच है। इसकी सह-अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रूस के पहले उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव करते हैं। इनके अतिरिक्त, भारत-रूस सामरिक आर्थिक संवाद परिवहन, कृषि, लघु एवं मध्यम उद्यम, डिजिटल परिवर्तन, बैंकिंग और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सहयोग की देखरेख करता है।

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