
बिहार चुनाव परिणाम तय करेंगे एसआईआर पर इंडिया गठबंधन का रुख
पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर इंडिया गठबंधन अपनी रणनीति अंतिम रूप देगा। कांग्रेस और अन्य दलों ने एसआईआर पर सवाल उठाए हैं। अगर महागठबंधन का प्रदर्शन बेहतर होता है, तो विरोध कमजोर हो सकता है, अन्यथा आक्रामकता बढ़ सकती है।
नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। पश्चिम बंगाल सहित देश के कई राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर इंडिया गठबंधन बिहार चुनाव परिणाम के बाद अपनी रणनीति को अंतिम रूप देगा। सैद्धांतिक तौर पर इंडिया गठबंधन एसआईआर के खिलाफ है, पर चुनाव परिणाम आक्रामकता तय करेंगे। कांग्रेस सहित महागठबंधन के कई घटकदल बिहार में एसआईआर को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बिहार में पहले चरण के मतदान से पहले भी अपने आरोपों को दोहराते हुआ कहा था कि कई पात्र मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं। उन्होंने ऐसे कई लोगों को मीडिया के सामने पेश भी किया।
रणनीतिकार मानते हैं कि इन सबके बावजूद चुनाव में महागठबंधन का प्रदर्शन बेहतर रहता है, तो एसआईआर के मुद्दे पर इंडिया गठबंधन का विरोध कमजोर पड़ सकता है। वहीं, प्रदर्शन खराब रहता है तो एसआईआर के मुद्दे पर इंडिया गठबंधन का विरोध आक्रामक हो सकता है। संसद सत्र में भी इसका असर दिखाई देगा। रणनीति बनाने को गठबंधन की बैठक जल्द दरअसल, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश सहित करीब एक दर्जन राज्यों में एसआईआर के खिलाफ एकजुट होकर रणनीति तय करने के लिए जल्द इंडिया गठबंधन की बैठक हो सकती है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस मुद्दे पर जहां आरपार की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं वहीं, दूसरी पार्टियों का रुख नरम है। समाजवादी पार्टी आरोप लगा रही है कि भाजपा एसआईआर के जरिए साजिश रच रही है। उनकी मंशा पात्र मतदाता विशेषकर सपा समर्थकों को मतदान से वंचित करना है। पार्टी ने सभी से मतदाता बनाने के काम को गंभीरता से लेने और इसमें पूरी तरह जुटने का आह्वान किया है। पर वह तृणमूल की तरह आक्रामक नहीं है। एसआईआर को लेकर कांग्रेस का रुख भी तृणमूल के मुकाबले नरम है। डीएमके भी एसआईआर के खिलाफ नहीं है। मुख्यमंत्री स्टालिन कह चुके हैं कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए पारदर्शी और ईमानदार मतदाता सूची आवश्यक है। पर साथ ही एसआईआर के फॉर्म को लेकर उन्होंने आयोग पर सवाल उठाए हैं।

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