एआई समिट: जनजातीय भाषा अनुवाद से लेकर क्वांटम सुरक्षा तक अपने स्टार्टअप के साथ पहुंचे लोग
नई दिल्ली। अभिनव उपाध्याय राष्ट्रीय राजधानी स्थित 'भारत मंडपम' में 'इंडिया एआई

नई दिल्ली। अभिनव उपाध्याय राष्ट्रीय राजधानी स्थित 'भारत मंडपम' में 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में राजधानी के शैक्षणिक संस्थानों की भी प्रमुख भागीदारी है। भारतीय प्रौद्योगिक संस्थान दिल्ली के शिक्षक व छात्र भी इसमें भाग ले रहे हैं। इस समिट के पहले दिन संस्थान के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रोफेसर संदीप कुमार के निर्देशन में चार शोधार्थियों की टीम यहां अदिवाणी नामक एआई-संचालित अनुवाद स्टार्टअप के साथ आई। इसके बारे में जानकारी देते हुए यार्डी स्कूल ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के शाश्वत भारद्वाज ने बताया कि भारत जैसे बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक देश में यह आवश्यक माना जा रहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाधान केवल अंग्रेजी तक सीमित न रहें, बल्कि भारतीय भाषाओं और विशेष रूप से जनजातीय भाषाओं की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप विकसित किए जाएं इसी सोच के साथ आईआईटी दिल्ली की एक शोध टीम ने समुदाय-आधारित एआई की अवधारणा पर कार्य करते हुए तकनीक को सीधे समुदाय की भागीदारी, अनुभव और आवश्यकताओं से जोड़ने का प्रयास किया है।
उन्होंने बताया कि इसमें हमारे साथ सिविल इंजीनियरिंग विभाग से पीएचडी कर रहे क्षितिज कुमार वर्मा,कंप्यूटर टेक्नोलॉजी से वैभव शर्मा तथा डिपार्टमेंट ऑफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से शोधार्थी पूजा सिंह हैं। अदिवाणी नामक एआई-संचालित अनुवाद मंच हिंदी, अंग्रेजी और विभिन्न जनजातीय भाषाओं के बीच दो-तरफा अनुवाद की सुविधा प्रदान करता है। साथ ही इसमें स्वचालित वाक् पहचान (एएसआर) और ऑप्टिकल अक्षर पहचान (ओसीआर) जैसी उन्नत तकनीकों को जोड़ा गया है, जिससे अलग-अलग साक्षरता स्तर वाले लोग भी इसका सरलता से उपयोग कर सकें। सितंबर में जारी इसके बीटा संस्करण को समुदाय और विशेषज्ञों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। इस परियोजना से जुड़े शोध-पत्र अंतरराष्ट्रीय प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण सम्मेलनों में भी प्रस्तुत किए जा चुके हैं, और अब शोधकर्ता एकीकृत बहुभाषी मॉडल विकसित करने की दिशा में कार्यरत हैं, ताकि भारत की भाषाई विविधता को डिजिटल मंचों पर समान प्रतिनिधित्व मिल सके। आईआईटी दिल्ली से कई और लोग अगले दिनों में अपने स्टार्टअप के साथ इस समिट में हिस्सा लेंगे। ---------- साइबर हमलों से रोकने में सक्षम है डीटीयू इंक्यूबेशन सेंटर में बना वज्र एक्स पहली बार आयोजित हो रहे इस एआई समिट में हिस्सा ले रहे हिमांशु वोहरा इस समिट को लेकर खासे उत्साहित हैं। उनका कहना है कि पहले दिन का अनुभव हमारे लिए अत्यंत उत्साहजनक और प्रेरणादायक रहा। पहले ही दिन ऊर्जा, नवाचार और तकनीकी चर्चाओं का एक सशक्त वातावरण देखने को मिला। डीटीयू के पूर्व छात्र होने के साथ हिमांशु आल सेक्योर एक्स कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी हैं। वह बताते हैं कि कंपनी वर्तमान में दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में इनक्यूबेटेड है और वैश्विक स्तर के सुरक्षा समाधान विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। भविष्य के संघर्ष केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि डेटा और साइबर स्पेस में भी लड़े जाएंगे। ऐसे में क्वांटम-सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार बन सकती है। इसलिए हम ऐसे मिशन पर काम कर रहे हैं जो आने वाले क्वांटम युग में भारत की डिजिटल और सामरिक सुरक्षा को सशक्त बनाने के लिए समर्पित है। आज दुनिया क्वांटम कंप्यूटिंग के युग की ओर बढ़ रही है, जहां पारंपरिक एन्क्रिप्शन सिस्टम भविष्य में असुरक्षित हो सकते हैं। ऐसे में क्वांटम सुरक्षा केवल एक तकनीकी विकल्प नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की आवश्यकता बन चुकी है। इसी के समानांतर, उभरते क्वांटम युग में साइबर सुरक्षा को लेकर भी भारतीय नवाचार तेजी से आगे बढ़ रहा है। कंपनी का हार्डवेयर मंच वज्रएक्स रक्षा-स्तरीय कूटलेखन प्रवर्तन, हार्डवेयर-आधारित एंट्रॉपी और क्रिप्टो-लचीलापन जैसी विशेषताओं से युक्त बताया जा रहा है, जो दीर्घकालिक सामरिक प्रणालियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायक हो सकता है। इस समिट में विशेष रूप से, हमें 30 से अधिक देशों से आई कंपनियों और प्रतिनिधियों के साथ संवाद का अवसर मिला। यूरोप, अमेरिका, मध्य-पूर्व और एशिया की टेक कंपनियों ने क्वांटम सुरक्षा और भविष्य की साइबर चुनौतियों पर गहरी रुचि दिखाई। यह देखना प्रेरणादायक था कि भारत में आयोजित मंच पर वैश्विक स्तर की तकनीकी बातचीत हो रही है। पहले ही दिन मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय संवाद ने हमें विश्वास दिलाया कि भारत क्वांटम और एआई सुरक्षा नवाचार में अग्रणी भूमिका निभा सकता है। हमारे स्टाल पर डीआरडीओ के अधिकारियों के अलावा अन्य राज्यों के लोग आए और सकारात्मक बातचीत की।


