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बढ़ते प्रदूषण से बच्चों की सेहत पर पड़ रहा बुरा असर : वॉरियर मॉम्स

बढ़ते प्रदूषण से बच्चों की सेहत पर पड़ रहा बुरा असर : वॉरियर मॉम्स

संक्षेप: वॉरियर मॉम्स समूह ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए 48 घंटे के भीतर ठोस कदम उठाने के लिए पत्र लिखा।

Sun, 2 Nov 2025 06:32 PMNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नई दिल्ली, वरिष्ठ संवाददाता। राजधानी में बढ़ रहे वायु प्रदूषण का प्रभाव स्कूल जाने वाले बच्चों पर पड़ रहा है। कई स्कूलों में प्राथमिक कक्षाओं के छात्रों की उपस्थिति कम दर्ज की जा रही है। छात्रों में खांसी, जुकाम जैसी शिकायत सामने आ रही हैं। इससे छात्रों की मां चिंता में हैं। इस समस्या को लेकर वॉरियर मॉम्स समूह ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए 48 घंटे के भीतर ठोस कदम उठाने के लिए पत्र लिखा है। इसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य परामर्श जारी करने के लिए अपील की गई है। समूह ने मांग की है कि वायु गुणवत्ता सूचकांक और पीएम 2.5 की सीमाएं जैसे एक्यूआई 200 और 300 से ऊपर, बताई जाएं, जिस पर बच्चों को घर के अंदर रहना चाहिए।

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बाहर जाने के लिए इस्तेमाल के लिए उपयुक्त मास्क के प्रकार और चेतावनी संकेत जिन पर बच्चों को तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है, स्पष्ट किए जाएं। पर्यावरण कार्यकर्ता और वॉरियर मॉम्स से जुड़ी भावरीन कंधारी ने कहा कि हमारे बच्चे कोई आंकड़े नहीं हैं। वे उन लाखों लोगों में शामिल हैं जो हर साल दिल्ली क्षेत्र में प्रदूषण संबंधी बीमारियों के कारण अस्पताल में भर्ती होते हैं। पत्र में कहा गया है कि हर साल दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले बच्चे गंभीर प्रदूषण का सामना करते हैं। इसका बुरा असर उनकी सेहत पर पड़ रहा है। बच्चे सुबह उठते ही खांसते हैं, अस्थमा के दौरे के कारण स्कूल नहीं जा पाते और खेल के मैदान में भी मास्क पहनते हैं। इसकी वजह यह है कि जिस हवा में वे सांस लेते हैं वह जहरीली है। बाल रोग विशेषज्ञ जांच करें पत्र में कहा गया है कि बाल रोग विशेषज्ञों और बाल चिकित्सा विभागों को दिशानिर्देश जारी किए जाएं कि बच्चों में प्रदूषण से जुड़े अस्थमा और फेफड़ों की क्षमता में कमी के लिए नियमित जांच को प्रोत्साहित करें। समूह ने कहा कि हाल के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में वायु गुणवत्ता एक गंभीर चरण में प्रवेश कर चुकी है। कुछ हिस्सों में समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक बेहद खराब से गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया है। यहां तक कि कुछ निगरानी केंद्रों पर एक्यूआई 400 से भी अधिक है। यह पूरी तरह स्पष्ट है कि बच्चे प्रतिदिन ऐसे हानिकारक वायु प्रदूषण के संपर्क में आते हैं जो उनके अल्पकालिक और दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है।